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रणनीति, माइक्रोमैनेजमेंट और मुद्दों की धार से BJP का बड़ा उलटफेर, बंगाल में बदला सत्ता समीकरण

अमित शाह की बूथ-स्तरीय पकड़, मोदी की अपील और ‘पांच ब्रह्मास्त्र’ ने दिलाई 207 सीटों की प्रचंड जीत।

By श्वेता सिंह

May 05, 2026 23:23 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह जीत किसी एक फैक्टर का नतीजा नहीं बल्कि एक सुनियोजित बहुस्तरीय रणनीति का परिणाम है, जिसे अंदरूनी तौर पर ‘पांच ब्रह्मास्त्र’ का नाम दिया गया।

भाजपा ने चुनाव के दौरान शासन से जुड़े मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाया। कथित सिंडिकेट राज, भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे विषयों को लेकर पार्टी ने लगातार टीएमसी पर निशाना साधा। इसके साथ ही सांस्कृतिक पहचान और खान-पान को लेकर बनाए जा रहे कथित “भ्रामक नैरेटिव” को भी चुनौती दी गई। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को भी अभियान के केंद्र में रखा गया, जिससे व्यापक जनसमर्थन मिला।

इस चुनाव में पार्टी की रणनीति का सबसे अहम पहलू माइक्रोमैनेजमेंट रहा। अमित शाह (Amit Shah) ने करीब 15 दिनों तक राज्य में डेरा डालकर चुनावी गतिविधियों की निगरानी की। बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय किया गया और कार्यकर्ताओं को 80,000 से अधिक बूथों पर पहुंचने का लक्ष्य दिया गया। सूत्रों के अनुसार, इस जमीनी पकड़ ने चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल दिए।

भाजपा इस बार उन सीटों पर भी जीत दर्ज करने में सफल रही, जिन्हें लंबे समय से टीएमसी का अभेद्य गढ़ माना जाता था। खास बात यह रही कि मुस्लिम बहुल जिलों-जैसे उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, मालदा और उत्तर दिनाजपुर- में भी पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। इन क्षेत्रों में 118 में से 56 सीटों पर जीत दर्ज कर भाजपा ने अपनी उपस्थिति मजबूत की, जबकि 2021 में यह आंकड़ा केवल 14 सीटों का था।

चुनाव के पहले चरण में ही भाजपा ने 152 में से 117 सीटें जीतकर स्पष्ट बढ़त बना ली थी। दूसरे चरण में भी पार्टी ने तेजी से बढ़त कायम रखते हुए 90 सीटों तक पहुंच बनाई, जो पिछले चुनाव के मुकाबले बड़ी छलांग है। कुल मिलाकर पार्टी ने अपने वोट शेयर में 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की और 130 सीटों का अतिरिक्त फायदा हासिल किया।

उत्तर बंगाल में पार्टी का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा, जहां कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और कालिम्पोंग में बड़ी जीत मिली। वहीं दक्षिण बंगाल में पूर्वी मेदिनीपुर, पुरुलिया और झाड़ग्राम जैसे जिलों में भी भाजपा ने मजबूती से पकड़ बनाई। इतना ही नहीं, राज्य के 10 जिलों में पार्टी ने क्लीन स्वीप करते हुए टीएमसी को खाता खोलने तक का मौका नहीं दिया।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि 10 वर्षों से टीएमसी के कब्जे वाली 162 सीटों में से 102 पर जीत और 15 वर्षों से लगातार जीत रही 119 सीटों में से 74 सीटों पर कब्जा इस चुनावी लहर का सबसे बड़ा प्रमाण है। यह नतीजे दर्शाते हैं कि मतदाताओं में बदलाव की मजबूत इच्छा थी।

इस जीत का श्रेय नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता और विकास की दृष्टि को भी दिया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, जहां टीएमसी ‘खेला होबे’ जैसे नारों के जरिए माहौल बनाने की कोशिश कर रही थी, वहीं भाजपा ने जमीनी संगठन, रणनीतिक योजना और मतदाताओं की आकांक्षाओं पर फोकस करते हुए चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ दिया।

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