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तमिलनाडु सियासी संकट: 28 AIADMK विधायक पुडुचेरी रिसॉर्ट में, सरकार गठन पर बढ़ा सस्पेंस

TVK की दावेदारी के बीच AIADMK खेमे में खींचतान, बहुमत के गणित पर टिकी निगाहें।

By श्वेता सिंह

May 07, 2026 17:11 IST

पुडुचेरीः तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की राजनीति से जुड़े 28 एआईएडीएमके (AIADMK) विधायकों को पुडुचेरी के पूरनकुप्पम स्थित एक निजी रिसॉर्ट में शिफ्ट किए जाने की खबर ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। इस कदम के बाद राज्य में सत्ता समीकरण को लेकर कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार ये सभी विधायक एआईएडीएमके (AIADMK) के वरिष्ठ नेता सी. वी. षणमुगम (C. V. Shanmugam) के समर्थक बताए जा रहे हैं। विधायकों की एक साथ मौजूदगी और उनकी लोकेशन बदलने को राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से इस पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

इस बीच तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख विजय (Vijay) सरकार बनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। उन्हें कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन मिल चुका है, लेकिन बहुमत के लिए अभी भी छह और विधायकों की जरूरत है। यही कारण है कि तमिलनाडु की राजनीति में अस्थिरता बनी हुई है।

सूत्रों के मुताबिक, टीवीके के लिए समर्थन जुटाने को लेकर विभिन्न स्तरों पर बातचीत जारी है। बताया जा रहा है कि एआईएडीएमके के कुछ नेताओं और टीवीके के बीच अनौपचारिक चर्चा भी हुई है, जिसमें सत्ता साझेदारी की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। इन चर्चाओं में यह भी दावा सामने आया है कि यदि समझौता होता है तो AIADMK नेता सी. वी. षणमुगम (C. V. Shanmugam) को उपमुख्यमंत्री पद और कुछ महत्वपूर्ण मंत्रालय दिए जा सकते हैं। इसी संभावित समीकरण ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।

हालांकि एआईएडीएमके (AIADMK) के शीर्ष नेतृत्व, विशेष रूप से एडप्पादी के. पलानीस्वामी (Edappadi K. Palaniswami) ने TVK को समर्थन देने के किसी भी प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई है। इससे पार्टी के भीतर मतभेद की स्थिति भी सामने आती दिख रही है। सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ नेता कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट का रुख करना शामिल है। साथ ही, कुछ स्तरों पर नए चुनाव की संभावना पर भी चर्चा चल रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति को अनिश्चितता के दौर में पहुंचा दिया है, जहां सरकार गठन का गणित लगातार बदलता नजर आ रहा है।

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