चेन्नईः तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक असमंजस की स्थिति बनी हुई है। तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) प्रमुख विजय (Vijay) ने गुरुवार को एक बार फिर चेन्नई स्थित राजभवन पहुंचकर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की और इसके बाद वहां से रवाना हो गए। यह पिछले 24 घंटों में उनकी दूसरी मुलाकात है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल और बढ़ गई है।
सरकार गठन का दावा और राजनीतिक समीकरण
टीवीके (TVK) ने कांग्रेस के समर्थन के साथ मिलकर कुल 113 विधायकों के समर्थन का दावा पेश किया है। हालांकि, 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का बहुमत आवश्यक होता है।
इस स्थिति में TVK बहुमत से 5 सीटें पीछे है। इसके बावजूद पार्टी का कहना है कि जनता ने उन्हें सबसे बड़ी पार्टी के रूप में चुना है, और उसी आधार पर उन्हें सरकार बनाने का अवसर मिलना चाहिए।
विपक्षी दलों की संवैधानिक मांग
थोल. तिरुमावलवन (Thol Thirumavalavan) ने राज्यपाल से मुलाकात कर मांग की है कि TVK को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए और विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार तमिलनाडु की राजनीति में हस्तक्षेप कर रही है, जिससे संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
माकपा (Communist Party of India) ने भी राज्यपाल से अपील की है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते TVK को पहले शपथ दिलाई जाए और बाद में विधानसभा में बहुमत साबित करने का मौका दिया जाए।
वहीं सीपीआई(एम) नेता पी. शन्मुगम ने कहा कि TVK प्रमुख के पत्र पर विचार किया जा रहा है और पार्टी की राज्य समिति की बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
राज्यपाल के फैसले पर टिकी निगाहें
अब पूरे राज्य की नजरें राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के फैसले पर टिकी हैं। अभी तक सरकार गठन को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। इस चुनाव में TVK ने द्रविड़ राजनीति के लंबे समय से चले आ रहे समीकरणों को चुनौती दी है। कांग्रेस के समर्थन के बावजूद स्पष्ट बहुमत न होने के कारण स्थिति जटिल बनी हुई है।
राज्य में अब यह सवाल प्रमुख है कि क्या TVK सरकार बना पाएगी या फिर राजनीतिक बातचीत के नए दौर की शुरुआत होगी।