विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी इसे अपनी 'हार' मानने के लिए तैयार नहीं है। इस वजह से उन्होंने लोकभवन जाने और आधिकारिक तौर पर पदत्याग करने से इनकार कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ आज यानी 7 मई की रात को 12 बजे उनकी सरकार की मियाद भी खत्म हो रही है। इसके बाद क्या होगा?
भाजपा ने 9 मई को शपथ ग्रहण समारोह रखा है जिस दिन कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनायी जाएगी। अगर ममता बनर्जी अपने फैसले पर अडिग रही तो बीच में शुक्रवार को 24 घंटे के लिए ही सही लेकिन राष्ट्रपति शासन लागू करने की संभावना पैदा हो रही है।
राजनीति विशेषज्ञों से लेकर कानून विश्लेषकों को मानना है कि ऐसा संभवतः किसी भी राज्य में पहली बार होने वाला है।
संवैधानिक नियमानुसार चुनाव का रिजल्ट घोषित होने के बाद सत्ताधारी पार्टी को जैसे ही अपनी हार निश्चित होने का पता चलता है, पार्टी अपनी हार स्वीकार कर लेती है और मुख्यमंत्री लोकभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप आती है। संसदीय राजनीति में इसे संवैधानिक शिष्टाचार माना जाता है।
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इसके बाद राज्यपाल सरकार गठन न होने तक पूर्व मुख्यमंत्री को बतौर केयरटेकर सरकार की जिम्मेदारी संभालने का अनुरोध करते हैं। नए मुख्यमंत्री और मंत्रीसभा के शपथ लेने से पहले वहीं काम करते हैं। हालांकि इस दौरान केयरटेकर मुख्यमंत्री कोई फैसला नहीं ले सकते हैं।
केंद्र सरकार के मामले में भी यहीं नियम लागू होता है। तमिलनाडु में डीएमके सरकार की मियाद खत्म हो चुकी है लेकिन वहां भी नई सरकार का शपथ ग्रहण नहीं हुआ है। लेकिन तमिलनाडु के साथ बंगाल में बड़ा फर्क है। तमिलनाडु में स्टैलिन और उनकी सरकार ने हार निश्चित होने के बाद इस्तीफा दे दिया है लेकिन बंगाल में ऐसा नहीं हुआ। राज्यपाल ने स्टैलिन से ही कार्यकारी मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालने का अनुरोध किया है।
वरिष्ठ वकील हरिश साल्वे ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल में राज्यपाल खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से 7 मई को इस्तीफे की मांग कर सकते हैं। उस दिन विधानसभा की मियाद खत्म होने के बाद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री नहीं रह सकेंगी। अगर राज्यपाल के निर्देशानुसार वह पदत्याग कर देती हैं तो नई सरकार के गठित होने तक वह कार्यकारी मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल सकती है।