ढाका:बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने बुधवार को उम्मीद जताई कि भारत के सीमावर्ती राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की चुनावी जीत के बाद लोगों को जबरन बांग्लादेश नहीं भेजा जाएगा।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें आशंका है कि अवैध प्रवासी होने के संदेह में लोगों को भारत से बांग्लादेश भेजे जाने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इस पर अहमद ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि ऐसी स्थिति पैदा नहीं होगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि सीमा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश को सीमावर्ती इलाकों में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गृह मंत्री की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब एक दिन पहले विदेश मंत्री खलीलुर रहमान का बयान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के आधिकारिक फेसबुक पेज पर साझा किया गया था। उसमें कहा गया था कि यदि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद “पुश-इन” जैसी घटनाएं होती हैं तो बांग्लादेश आवश्यक कदम उठाएगा।
सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए गए, जिनमें भारतीय जनता पार्टी ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की। चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी सरकार पर बांग्लादेशी नागरिकों की पश्चिम बंगाल में घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज किया था।
इसके अलावा, भारतीय जनता पार्टी ने असम में भी लगातार तीसरी बार सत्ता बरकरार रखी।
“पुशबैक” शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर उन लोगों को सीमा पार भेजने की कार्रवाई के लिए किया जाता है, जिन्हें अवैध प्रवासी माना जाता है। वहीं जिस देश में उन्हें भेजा जाता है, वहां इस प्रक्रिया को “पुश-इन” कहा जाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत और बांग्लादेश के बीच इस तरह के अधिकांश मामले पूर्वोत्तर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े रहे हैं।