मुंबई : ईरान युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इस बीच रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि यदि लंबे समय तक कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहे तो भारत की तेल विपणन कंपनियों पर कर्ज का दबाव बढ़ सकता है।
रेटिंग एजेंसी का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के अनुरूप घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम नहीं बढ़ाए गए तो तेल विपणन कंपनियों की आय और नकदी प्रवाह पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। इससे इन कंपनियों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है।
फिच रेटिंग्स के अनुसार कम समय के लिए कीमतों में उतार-चढ़ाव की तुलना में लंबे समय तक तेल की ऊंची कीमतें बनी रहना कंपनियों के लिए अधिक जोखिम पैदा करेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है लेकिन पेट्रोल पंपों पर उसी अनुपात में कीमतें नहीं बढ़तीं तो कंपनियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए कंपनियों को अधिक मात्रा में तेल का भंडारण करना पड़ सकता है। साथ ही तेल शोधन की प्रक्रिया बढ़ने से कार्यशील पूंजी की आवश्यकता भी बढ़ जाएगी। इससे कंपनियों के मुक्त नकदी प्रवाह पर अतिरिक्त दबाव बनेगा।
फिच रेटिंग्स का कहना है कि आने वाले समय में तेल विपणन कंपनियों की आर्थिक स्थिरता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें कितने समय तक बनी रहती हैं।