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“डेविड ऐटेनबरो: 100 साल में भी प्रकृति के सबसे प्रभावशाली शिक्षक”

72 वर्षों से दुनिया को प्रकृति का पाठ पढ़ा रहे हैं ऐटेनबरो

इंग्लैंड : लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में आज दिनभर का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की तैयारी छह महीने पहले शुरू की गई थी जिसे मशहूर वेस्टर्न क्लासिकल म्यूजिक कंडक्टर जेरेमी कुन ने संभाला। वायलिन, वायोला, चेलो, क्लैरिनेट, ट्रॉम्बोन, ट्रम्पेट, सिम्बल और अन्य कई वाद्ययंत्रों के साथ-साथ इस पूरे कंसर्ट में ऑर्केस्ट्रा के बीच रेजर स्नेक की हिसहिस, गहरे समुद्र में ऑर्का व्हेल के शिकार की आवाज और विभिन्न पशु-पक्षियों की आवाज़ें भी शामिल की गईं।

आज का यह कार्यक्रम अपूर्ण रहता यदि यह मिश्रण नहीं होता। जिसका यह कार्यक्रम था वह है डेविड ऐटेनबरो। हमेशा मुस्कुराते रहने वाले, हर किसी के मित्र और टेलीविजन जगत के सबसे लोकप्रिय शो-होस्ट, आज 100 वर्ष के हो गए। 1954 से अब तक उन्होंने लगातार 72 वर्षों से पूरी दुनिया को प्रकृति का पाठ पढ़ाया है।

ब्रिटिश राजघराने से लेकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बाराक ओबामा, टेनिस स्टार रोजर फेडरर, और बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन तक — इस शताब्दी के ‘युवा’ के प्रशंसक अनगिनत हैं। दुनिया भर के स्कूल और कॉलेजों के छात्र उनके कार्यक्रम देखकर प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को अपना पेशा चुनते हैं। ऐटेनबरो की व्यक्तित्व, हास्यबोध, गर्मजोशी, विद्वता और अद्भुत कहानी कहने की क्षमता उन्हें विश्व का सबसे प्रसिद्ध प्रसारण स्टार बनाती है।

2019 में ब्रिटेन की रानी एलिज़ाबेथ द्वितीय ने उनकी प्रशंसा करते हुए कहा था प्रकृति की सुंदरता और उसकी वर्तमान नाजुक स्थिति को लोगों तक पहुँचाने में आपकी भूमिका का कोई मुकाबला नहीं है। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है। ऐटेनबरो के वृत्तचित्र ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों के दर्शकों को प्रकृति के चमत्कार और उसकी त्रासदी दोनों ही दिखाई हैं।

2012 में उन्होंने 'लोनसाम जॉर्ज' का परिचय कराया, जो प्रशांत महासागर के पिंटा द्वीप का अंतिम कछुआ था। उस समय ऐटेनबरो की उम्र 86 साल थी। उन्होंने कहा था जॉर्ज की उम्र लगभग 80 है। जोड़ों में थोड़ी कठोरता है — मेरे जैसे ही। शूटिंग समाप्त होने के दो सप्ताह बाद जॉर्ज का निधन हो गया जिससे पिंटा आईलैंड कछुओं की पूरी प्रजाति विलुप्त हो गई। ऐटेनबरो ने कहा, “जॉर्ज ने हमें दिखाया कि पर्यावरण कितना नाजुक है।

उनके जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक है 1979 की प्रसिद्ध श्रृंखला ‘लाइफ ऑन अर्थ’ की शूटिंग। इस दौरान माउंटेन गोरिल्ला के दो नटखट बच्चे उनके ऊपर चढ़कर खेलने लगे थे। ऐटेनबरो ने अपने जीवन में अनगिनत वृत्तचित्र बनाए हैं, लेकिन ‘लाइफ ऑन अर्थ’ को अक्सर युगांतकारी कहा जाता है। 1976 में इस श्रृंखला की तैयारी शुरू हुई थी और इससे पहले इतनी व्यापक स्तर पर ‘नेचुरल हिस्ट्री’ पर टीवी श्रृंखला बनाने का प्रयास नहीं किया गया था। तीन वर्षों तक चली शूटिंग में पूरी टीम ने लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर की यात्रा की और 40 देशों का दौरा किया। 600 से अधिक जीव-जंतुओं की छवियां ली गईं।

ब्रिटेन में विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार, डेविड ऐटेनबरो को देश का सबसे सम्मानित व्यक्ति और जीवित सांस्कृतिक प्रतीक माना गया है। लेकिन वह इन उपाधियों को ज्यादा महत्व नहीं देते और हमेशा हंसते रहते हैं। 1954 में पहली बार बीबीसी कैमरे के सामने आने के बाद से वे हमेशा निर्विकल्प बने रहे।

जलवायु परिवर्तन की बढ़ती दर के कारण 1990 के दशक के बाद ऐटेनबरो ने अधिक समय लोगों को जागरूक करने में बिताया। 2017 की ब्लॉकबस्टर श्रृंखला ‘ब्लू प्लैनेट–टू’ में उन्होंने समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण की भयावहता दिखाई। समुद्र से उठाया गया प्लास्टिक गलती से चूजों को खिलाया जा रहा था — यह दृश्य दर्शकों के लिए एक बड़ा झटका था। ऐटेनबरो ने कहा मैं अपने पोते-पोतियों के सामने कैसे कहूँ?पृथ्वी की स्थिति इतनी नाजुक है और मैंने कुछ नहीं किया।

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