परीक्षा का रिजल्ट घोषित होने से पहले तनाव को कम करने के लिए भी उसने किताबों में ही अपना चेहरा छिपाने की कोशिश की। किताबें ही उसकी सबसे करीबी साथी हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, उसकी आयु के सभी बच्चे जहां पढ़ने बैठने के लिए डांट खाते हैं वहीं बीरभूम का प्रियतोष मुखर्जी किताबें खोलकर बैठे रहने की वजह से अपनी मां से डांट खाता था।
पश्चिम बंगाल माध्यमिक की परीक्षा में उसने दूसरा स्थान प्राप्त किया है। सरोजिनी देवी शिशुमंदिर का मेधावी छात्र प्रियतोष कहता है कि उसे इतने अच्छे रिजल्ट की उम्मीद ही नहीं थी। उसका कहना है कि मैं तो अपना रिजल्ट देखकर पूरी तरह से सरप्राइज ही हो गया। मैं यकीन ही नहीं कर पा रहा हूं।
2026 की माध्यमिक परीक्षा में प्रियतोष मुखर्जी ने कुल 696 अंक प्राप्त किए हैं। अपने रिजल्ट से पहले वह इतने तनाव में था कि उसने अपने शिक्षक को फोन कर खुद ही पढ़ाने के लिए अनुरोध किया। वह अपने अंग्रेज़ी शिक्षक से पढ़ाई कर रहा था, तभी उसे यह खुशखबरी मिली।
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मीडिया से बात करते हुए प्रियतोष ने कहा कि सुबह से बहुत टेंशन हो रहा था। मैंने अंग्रेजी के सर को फोन करके कहा कि सर आ जाइए, पढ़ाई करने से टेंशन कम होगा। सर की पत्नी ने फोन करके बताया कि मैंने राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। यह सुनकर मुझे बिल्कुल विश्वास नहीं हुआ। फिर जब सबने बताया, तब समझ आया कि यह सच है। मैं अपने माता-पिता और शिक्षकों को प्रणाम करता हूं।
अपनी सफलता का श्रेय वह पूरी तरह अपने गुरुओं को दे रहा है। भविष्य में वह IIT से पढ़ाई करना चाहता है और इंजीनियर बनने का लक्ष्य रखता है।
प्रियतोष के माता-पिता और परिजन उसकी किताब पढ़ने की आदत को उसकी लगन का हिस्सा ही मानते हैं। इस मेधावी छात्र का कहना है कि पूरे दिन किताबों में डूबे रहकर पढ़ाई करना जरूरी नहीं है। उसके अनुसार दिन में 4–5 घंटे की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई ही महत्वपूर्ण है। पढ़ाई के साथ-साथ उसे संगीत सुनना और टहलना भी बेहद पसंद है।
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प्रियतोष के माता-पिता दोनों ही पेशे से शिक्षक हैं इसलिए घर में हमेशा पढ़ाई का माहौल रहा है। प्रियतोष की मां सोमा गिरी मुखोपाध्याय ने बताया कि वह पढ़ाई के अलावा कुछ और समझता ही नहीं है। किताब ही उसकी सबसे बड़ी साथी है। रिजल्ट वाले दिन सुबह ही वे अच्छी खबर की उम्मीद में टीवी चालू करके रिज़ल्ट की घोषणा सुन रहे थे। वे मेधासूची के नाम ध्यान से सुन रहे थे।
हालांकि उन्हें पूरा विश्वास था कि उनका बेटा मेधावी है, लेकिन 9 लाख 31 हजार से अधिक परीक्षार्थियों में माध्यमिक में दूसरे स्थान पर आएगा यह उन्होंने भी नहीं सोचा था। उन्होंने बताया कि वह दिन-भर पढ़ाई में ही लगा रहता था। बल्कि मुझे उसे किताब बंद करवाने के लिए डांटना पड़ता था - मैं कहती थी, बहुत पढ़ लिया, अब खाने आ जा। उसकी कोई और आदत नहीं है।
बेटे की सफलता से उत्साहित मां चाहती हैं कि दो साल बाद होने वाली उच्च माध्यमिक परीक्षा की मेधासूची में भी प्रियतोष का नाम शामिल हो।