नई दिल्लीः क्या दुनिया फिर किसी नए वैश्विक स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ रही है? कोविड महामारी की भयावह यादें अभी पूरी तरह धुंधली भी नहीं हुई थीं कि अब हंता वायरस को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ने लगी है। अटलांटिक महासागर में चल रहे डच क्रूज जहाज ‘एमवी होंडियास’ पर इस वायरस के संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। जहाज पर अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई यात्री संक्रमित बताए जा रहे हैं। पीपीई किट पहने डॉक्टरों की तस्वीरें लोगों को कोविड काल की याद दिला रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, हंता वायरस आमतौर पर चूहों और जंगली कृन्तकों के मल, मूत्र या लार के संपर्क से फैलता है। हालांकि वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता ‘एंडीज’ नामक वायरस स्ट्रेन को लेकर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक यह दुर्लभ स्ट्रेन इंसान से इंसान में भी फैल सकता है।
इससे पहले वर्ष 2018 में अर्जेंटीना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक संक्रमित व्यक्ति से 34 लोग संक्रमित हो गए थे। इनमें से 11 लोगों की मौत हुई थी। बताया जा रहा है कि डच क्रूज जहाज पर संक्रमित पाए गए लोगों में भी यही एंडीज स्ट्रेन मिला है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान ‘बीएनओ न्यूज’ और ‘द गार्जियन’ की रिपोर्टों के अनुसार संक्रमण अब केवल उस जहाज तक सीमित नहीं माना जा रहा। दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में एक महिला की मौत हुई है, जो एक विमान परिचारिका के संपर्क में आई थी। वह विमान परिचारिका फिलहाल नीदरलैंड में इलाज करा रही है।
इसके अलावा ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और अमेरिका के कैलिफोर्निया तथा एरिज़ोना क्षेत्रों में विदेश से आने वाले यात्रियों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अर्जेंटीना के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक जून 2025 से अब तक देश में हंता वायरस के 101 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इसी बीच इज़रायल में भी हंता वायरस संक्रमण का पहला मामला सामने आने की खबर मिली है। भारत में भी हंता वायरस पूरी तरह नया नहीं है। वर्ष 1964 में तमिलनाडु के वेल्लोर में पहली बार इसका ‘थोट्टापालयम’ स्ट्रेन पाया गया था। इसके बाद 2008 और 2016 में भी कुछ अलग-अलग मामलों की जानकारी मिली थी, लेकिन संक्रमण बड़े स्तर पर नहीं फैला। विशेषज्ञों के अनुसार किसान, गोदाम कर्मचारी और लंबे समय से बंद व धूलभरी जगहों की सफाई करने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है।
हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की महामारी विशेषज्ञ मारिया वैन करखोव ने लोगों से घबराने की जरूरत नहीं बताई है। उनका कहना है कि यह कोविड जैसा वायरस नहीं है और वैज्ञानिक लंबे समय से इसके बारे में जानते हैं। उनके अनुसार इसका फैलाव कोविड-19 से अलग है और आम लोगों के संक्रमित होने का खतरा अभी कम माना जा रहा है। वहीं संक्रामक रोग विशेषज्ञ ह्यूगो पिज्जी का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अर्जेंटीना जैसे देशों में तापमान बढ़ रहा है, जिससे चूहों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। इससे भविष्य में संक्रमण का जोखिम बढ़ने की आशंका है।
फिलहाल डच क्रूज जहाज कैनरी द्वीपसमूह की ओर बढ़ रहा है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक तेद्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि संगठन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। संक्रमित लोगों को आइसोलेशन में रखा जा रहा है और जरूरत पड़ने पर मास्क इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी घबराने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और सतर्कता नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले समय में यह चिंता का बड़ा कारण बन सकता है।