बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने वीबी-जी रैम जी अधिनियम के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है। राज्य के कानून मंत्री एच. के. पाटिल ने गुरुवार को कैबिनेट बैठक के बाद इसकी जानकारी दी।
मंत्री एच. के. पाटिल ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सरकार इस अधिनियम को अदालत में चुनौती देगी। उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने कानूनी रास्ता अपनाने पर सहमति जताई है और जल्द ही इस मामले में याचिका दायर की जाएगी।
हालांकि सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि कानून के किन प्रावधानों को अदालत में चुनौती दी जाएगी और इसके पीछे क्या मुख्य आधार होंगे। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राज्य सरकार औपचारिक रूप से अदालत का रुख करेगी।
इससे पहले 7 फरवरी को कर्नाटक विधानसभा ने विवादित वीबी-जी राम जी अधिनियम के विरोध में एक प्रस्ताव पारित किया था। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इस प्रस्ताव को तुरंत गैरकानूनी करार देते हुए इसका विरोध किया था। इसके बाद राज्य और केंद्र सरकार के बीच कानूनी और राजनीतिक टकराव की स्थिति बनने की संभावना जताई जा रही है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि इस कानून में महात्मा गांधी का नाम योजना से हटा दिया गया है। साथ ही अधिनियम में केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में फंडिंग का प्रावधान रखा गया है, जबकि पहले रोजगार गारंटी योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी।
‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ केंद्र सरकार द्वारा दिसंबर 2025 में पारित किया गया नया कानून है। इस अधिनियम के लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), 2005 को निरस्त कर दिया गया।
इसी बीच केरल विधानसभा ने भी एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 को वापस लेने की मांग की है। साथ ही राज्य ने मनरेगा 2005 को फिर से बहाल करने की अपील भी की है।
विपक्ष लगातार इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है। विरोधी दलों का आरोप है कि यह कानून लोगों के काम के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश है।