जयपुर : वाइस एडमिरल ए. एन. प्रमोद जो भारतीय नौसेना के निदेशक जनरल नौसेना संचालक हैं उन्होंने गुरुवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के भीतर गहराई तक मौजूद आतंकी ढांचे पर सटीक प्रहार करने की क्षमता का प्रदर्शन किया और पाकिस्तान की परमाणु धमकियों को प्रभावी रूप से 'झूठा साबित' कर दिया।
जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर वाइस एडमिरल प्रमोद ने कहा कि इस अभियान ने भारत की रणनीतिक दृढ़ता, परिचालन तैयारियों और बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।
उन्होंने कहा कि लंबी दूरी तक सटीक मार करने वाले हथियारों से पाकिस्तान के भीतर आतंक के केंद्रों पर प्रहार कर भारत ने पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेलिंग को प्रभावी रूप से झूठा साबित कर दिया।
वाइस एडमिरल प्रमोद ने यह भी कहा कि यह अभियान राष्ट्रीय नेतृत्व की रणनीतिक दृष्टि का परिणाम था जिसमें सशस्त्र बलों को स्पष्ट और बिना किसी अस्पष्टता के मिशन दिया गया था और आवश्यक परिचालन स्वतंत्रता भी प्रदान की गई थी।
उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व ने एक स्पष्ट और सटीक जनादेश दिया साथ ही आवश्यक परिचालन स्वतंत्रता भी प्रदान की जिससे भारतीय रक्षा बलों को निर्णायक कारवाई करने में मदद मिली।
वाइस एडमिरल ने बताया कि 6 और 7 मई 2025 की रात को भारतीय नौसेना के कर्मियों ने भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमलों में भाग लिया जिससे तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता (जॉइंटनेस) का प्रदर्शन हुआ।
उन्होंने आगे कहा कि जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ा, भारतीय नौसेना की अग्रिम तैनाती ने पाकिस्तान की नौसेना और वायु इकाइयों को रक्षात्मक स्थिति में रहने के लिए मजबूर कर दिया जिससे वे मुख्य रूप से अपने तटीय क्षेत्रों और बंदरगाहों तक सीमित हो गए।
वाइस एडमिरल प्रमोद ने स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की भूमिका पर भी जोर दिया जिसमें ड्रोन, बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली और एंटी-यूएएस (अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स) तकनीक शामिल थीं। उन्होंने कहा कि भारतीय स्वदेशी जहाजों जैसे विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, और कोलकाता तथा विशाखापत्तनम श्रेणी के विध्वंसक जहाजों के प्रदर्शन ने भारत की स्वदेशी क्षमता और समुद्री युद्ध तैयारी को सिद्ध किया।
इसी बीच पूर्व महानिदेशक सैन्य संचालन राजीव घई ने भी ऑपरेशन सिंदूर को भारत की रणनीतिक यात्रा का एक निर्णायक क्षण बताया और कहा कि इसने आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति में बड़ा बदलाव दर्शाया।
ऑपरेशन सिंदूर को 7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में स्थित नौ आतंकी लॉन्चपैड नष्ट किए थे जो लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े थे और इस कारवाई में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे।
इसके बाद चार दिनों तक सैन्य टकराव चला और अंततः 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी जिसके साथ यह संघर्ष समाप्त हुआ।