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जानवरों के खिलाफ अपराध के 9,039 मामले, 10 हजार गिरफ्तार, NCRB ने पहली बार पशुओं को भी अपनी रिपोर्ट में जोड़ा

एनसीआरबी (NCRB) रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जानवरों को मारना, जहर देना, घायल करना या उनके साथ क्रूरता करना अपराध है।

By लखन भारती

May 08, 2026 15:13 IST

नई दिल्ली: देश में पहली बार जानवरों के खिलाफ होने वाले अपराधों का पूरा रिकॉर्ड अब सरकारी अपराध आंकड़ों का हिस्सा बन गया है। National Crime Records Bureau यानी एनसीआरबी ने अपनी रिपोर्ट क्राइम इन इंडिया 2024 में पहली बार पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 से जुड़े मामलों को अलग से दर्ज किया है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 में देशभर में पशुओं के खिलाफ क्रूरता के 9,039 मामले दर्ज किए गए।

जानवरों संग क्रूरता करने वाले 10,312 लोग गिरफ्तार

गृह मंत्रालय की ओर से जारी इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इन मामलों में पूरे साल के दौरान 10,312 लोगों को गिरफ्तार किया गया यानी हर दिन औसतन कई लोग जानवरों के साथ मारपीट, जहर देने, घायल करने या दूसरी तरह की क्रूरता के आरोप में पकड़े गए। रिपोर्ट के मुताबिक इन मामलों में चार्जशीट दाखिल करने की दर 96.7 प्रतिशत रही, जो काफी ज्यादा मानी जा रही है। वहीं दोषसिद्धि दर यानी कोर्ट में सजा मिलने की दर 80.5 प्रतिशत दर्ज की गई। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में मामलों में अदालतों ने आरोपियों को दोषी माना है। कई मामले अब भी अदालतों में लंबित हैं। रिपोर्ट के अनुसार 82.2 प्रतिशत मामले अभी भी कोर्ट में चल रहे हैं वहीं 147 मामलों को सबूतों की कमी या कोई सुराग न मिलने की वजह से बंद कर दिया गया। जांच के दौरान दो मामले ऐसे भी थे जो कानूनी कारणों या आरोपी की मौत की वजह से खत्म हो गए।

जानवरों के खिलाफ हिंसा अब सिर्फ छोटा अपराध नहीं

एनसीआरबी रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि जानवरों को मारना, जहर देना, घायल करना या उनके साथ क्रूरता करना अपराध है। ऐसे मामलों में Ministry of Home Affairs के तहत लागू पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। रिपोर्ट में पशु चोरी के मामलों का भी जिक्र किया गया है। 2024 में देशभर में पशु चोरी के 8,660 मामले दर्ज हुए, जिनकी कुल कीमत करीब 48.8 करोड़ रुपये बताई गई। इनमें लगभग 44.9 प्रतिशत मामलों में चोरी हुए पशुओं को बरामद कर उनके मालिकों को वापस सौंप दिया गया।

पहली बार मिली अलग पहचान

अब तक पशु क्रूरता के मामलों को स्पेशल एंड लोकल लॉ यानी एसएलएल की सामान्य कैटेगरी में डाल दिया जाता था। इससे यह पता ही नहीं चल पाता था कि देश में जानवरों के खिलाफ कितने अपराध हो रहे हैं और उन मामलों में कार्रवाई कहां तक पहुंची। अब पहली बार एनसीआरबी ने इन मामलों को अलग पहचान दी है। इसका मतलब है कि अब एफआईआर दर्ज होने से लेकर जांच, चार्जशीट और कोर्ट के फैसले तक पूरी प्रक्रिया को ट्रैक किया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया भर की कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जानवरों के खिलाफ हिंसा और इंसानों के खिलाफ हिंसा के बीच गहरा संबंध होता है। कई मामलों में पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले लोग घरेलू हिंसा, महिलाओं के खिलाफ अपराध या दूसरे गंभीर अपराधों में भी शामिल पाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अब भारत में भी राष्ट्रीय स्तर का डेटा उपलब्ध होने से ऐसे पैटर्न की जांच की जा सकेगी। इससे अपराध रोकने की रणनीतियों को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

जानकारों के मुताबिक भारत में लंबे समय से पशु क्रूरता के मामलों को गंभीरता से नहीं लिया जाता था। अक्सर लोग ऐसे मामलों को छोटी घटना मानकर नजरअंदाज कर देते थे,लेकिन अब जब यह अपराध राष्ट्रीय डेटा का हिस्सा बन गया है, तो पुलिस, अदालतों और सरकार पर जवाबदेही भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे समाज में जानवरों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी और लोगों को यह संदेश जाएगा कि जानवरों के खिलाफ हिंसा भी उतना ही गंभीर अपराध है जितना किसी इंसान के खिलाफ हिंसा।

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