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ईरान के तेल ठिकानों पर गुप्त हमला, पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा गहराया

‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के दावे से मचा भूचाल, अमेरिका की जानकारी में हुआ हमला। ईरान के तेल ठिकाने बने निशाना।

वाशिंगटनः पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक विस्फोटक रिपोर्ट ने नई हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी अखबार द वाल स्ट्रीट जर्नल ने दावा किया है कि अप्रैल की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने गुप्त रूप से (Iran) के तेल शोधनागारों पर हवाई हमला (Air Strike) किया था। हालांकि इस हमले को लेकर अब तक यूएई की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला पारस्य खाड़ी के पास स्थित लाभान द्वीप पर किया गया, जहां ईरान (Iran) के कई अहम तेल ठिकानें मौजूद हैं। इन संयंत्रों का संचालन ईरान की सरकारी तेल कंपनी नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (National Iranian Oil Company) करती है। बताया गया है कि हमले में इन प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा था।

दरअसल, 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त एयर स्ट्राइक के बाद पूरे क्षेत्र में संघर्ष तेज हो गया था। इसके जवाब में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates), कुवैत (Kuwait) और बहरैन (Bahrain) पर ड्रोन और मिसाइल हमले शुरू कर दिए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केवल एक सप्ताह के भीतर ईरान ने यूएई पर करीब 2800 ड्रोन और मिसाइल दागे।

इसी हमले के जवाब में यूएई ने ईरान के तेल ढांचे को निशाना बनाया। उस समय तेहरान ने यह स्वीकार किया था कि उसके तेल शोधनागारों पर हमला हुआ है, लेकिन किसी देश का नाम नहीं लिया था। ईरान ने सिर्फ इतना कहा था कि “दुश्मन ताकतों” की कार्रवाई में भारी नुकसान हुआ।

रिपोर्ट में ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि व्हाइट हाउस को इस कार्रवाई की पहले से जानकारी थी। अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका ने इस कदम पर आपत्ति नहीं जताई थी। इतना ही नहीं, पश्चिम एशिया के किसी अन्य देश द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई किए जाने पर भी अमेरिकी प्रशासन विरोध के मूड में नहीं था।

इस पूरे मामले पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) के विदेश मंत्रालय ने सिर्फ इतना कहा कि देश को “शत्रुतापूर्ण गतिविधियों का जवाब देने के लिए सैन्य कार्रवाई का अधिकार है।”

सूत्रों के मुताबिक, युद्ध के दौरान ईरानी हमलों से बचाने के लिए इजरायल (Israel) ने यूएई में अपने एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात किए थे। इससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय स्तर पर सैन्य सहयोग पहले से सक्रिय था।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। अब तक संयुक्त अरब अमीरात एक ओर अमेरिका और इजरायल का करीबी सहयोगी था, वहीं दूसरी ओर वह ईरान के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंध भी बनाए हुए था। ऐसे में ईरान की धरती पर कथित सैन्य हमला क्षेत्रीय समीकरणों को और अधिक अस्थिर कर सकता है।

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