पश्चिम एशिया के युद्ध को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। शांति वार्ता की बैठक भी पाकिस्तान में ही आयोजित हुई थी। लेकिन अब इस्लामाबाद की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। गत सोमवार को अमेरिकी मीडिया में CBS News में एक रिपोर्ट छपी, जिसके बाद से ही यह सवाल उठने लगा है। पर आखिर है क्या उस रिपोर्ट में?
अमेरिकी मीडिया में छपी इस रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के हमलों से बचने के लिए ईरान ने कथित तौर पर अपने लड़ाकू विमान पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों में छिपाकर रखे थे। इस खबर के सामने आने के बाद वॉशिंगटन काफी नाराज बताया जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
क्या है मीडिया रिपोर्ट का दावा
मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जैसे ही युद्धविराम की घोषणा की इसके तुरंत बाद ईरान ने अपने कुछ लड़ाकू विमानों को पाकिस्तान के नूर खान एयर बेस में छिपा दिया था।
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रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि लड़ाकू विमानों के साथ ईरान का RC-130 निगरानी विमान भी वहां मौजूद था। यह अमेरिकी कंपनी Lockheed C-130 Hercules विमान का एक विशेष संस्करण माना जाता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के कुछ लड़ाकू विमान जो अब भी सुरक्षित बचे हुए हैं, उन्हें अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए ही यह कदम उठाया गया था।
अमेरिकी सीनेटर की कड़ी आपत्ति
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम (Lindsey Graham) ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने अपने X हैंडल पर लिखा है कि अगर यह सच है, तो मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका की हमें नए सिरे से समीक्षा करनी होगी।
हालांकि, लिंडसे का मानना है कि पाकिस्तान के लिए ऐसा करना पूरी तरह असंभव भी नहीं है। उन्होंने कहा कि इजरायल को लेकर पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों की कुछ टिप्पणियों को देखने से ही उनकी मानसिकता समझी जा सकती है। अगर यह सच निकला तो कम-से-कम मुझे हैरानी नहीं होगी।”
पाकिस्तान ने आरोपों को किया खारिज
हालांकि पाकिस्तान ने अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नूर खान एयर बेस कोई सुनसान इलाके में नहीं है बल्कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है। वहां ईरान के लड़ाकू विमानों को छिपाकर रखना संभव नहीं है।
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान एक ओर अमेरिका के साथ अपने करीबी संबंध बनाए रखना चाहता है जबकि दूसरी ओर वह ईरान या चीन को नाराज करने का जोखिम भी नहीं उठा सकता। दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में पाकिस्तान पर काफी दबाव बढ़ गया है।
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इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान ने सिर्फ पाकिस्तान बल्कि अफगानिस्तान में भी कुछ विमान छिपाकर रखे थे। हालांकि वहां केवल सामान्य नागरिक विमान मौजूद थे। कोई सैन्य विमान रखा गया था या नहीं, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। इन दावों को अफगानिस्तान ने स्वीकार कर लिया है।
अफगानिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बाबत कहा कि ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने की वजह से महान एयर (Mahan Air) का एक विमान काबुल में मौजूद था। बाद में उसे हेरत अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट ले जाया गया। हालांकि तालिबानी प्रवक्ता ज़बिहुल्ला मुजाहिद ने इन आरोपों से साफ इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि ईरान को हमारी जमीन पर विमान रखने की कोई जरूरत नहीं है।