कोलकाताः राज्य में नगरपालिका भर्ती घोटाले को लेकर जांच एक बार फिर तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व दमकल मंत्री सुजीत बसु को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी से पहले उनसे लगभग 10 घंटे तक लंबी और लगातार पूछताछ की गई। ईडी का आरोप है कि राज्य की 17 नगरपालिकाओं में विभिन्न पदों पर हुई नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं और इस दौरान पैसों के लेन-देन के भी संकेत मिले हैं।
जांच एजेंसी ईडी का दावा है कि दक्षिण दमदम नगरपालिका इस पूरे मामले का मुख्य केंद्र रही है। यहां स्टाफ, क्लर्क, ड्राइवर और सफाई कर्मियों की नियुक्तियों में नियमों को दरकिनार किया गया। सुजीत एक समय में दक्षिण दमदम नगर पालिका के डिप्टी मेयर थे।उनके कार्यकाल के दौरान लगभग 150 नियुक्तियों में गड़बड़ी की बात जांच में सामने आई है। ईडी का कहना है कि इन नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं थी और कई मामलों में नौकरी देने के बदले रकम लेने के संकेत मिले हैं।
सोमवार को सुजीत बसु को सॉल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में ईडी दफ्तर बुलाया गया था। वे सुबह करीब साढ़े दस बजे वहां पहुंचे और देर रात तक उनसे लगातार पूछताछ चलती रही। जांच के दौरान ईडी ने उनके पिछले बयान, दस्तावेजों और बैंक लेन-देन से जुड़े सवाल पूछे। एजेंसी के अनुसार, पहले दिए गए बयान और सोमवार को दिए गए जवाबों में कई जगह असंगतियां पाई गईं। साथ ही, जब्त किए गए दस्तावेजों से भी उनके जवाब मेल नहीं खा रहे थे। इन्हीं विरोधाभासों के आधार पर रात करीब नौ बजे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया।
ईडी का यह भी कहना है कि यह जांच सिर्फ एक नगरपालिका तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य की लगभग 17 नगरपालिकाओं में इसी तरह की भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इनमें हालीशहर और मध्यग्राम जैसी नगरपालिकाएं भी शामिल हैं। जांच करने वालों का दावा है कि स्वीपर और ड्राइवर समेत कई पोस्ट के लिए भर्ती के दौरान चार से सात लाख रुपये लिए गए थे। उसी सोर्स के आधार पर नगर पालिका भर्ती भ्रष्टाचार मामले की जांच शुरू हुई। उसी सोर्स के आधार पर ED ने सबसे पहले 12 जनवरी, 2024 को सुजीत के घर की तलाशी ली। तब राज्य में तृणमूल की सरकार थी। सुजीत दमकल मंत्री थे। नतीजतन, उस छापे पर भारी हंगामा शुरू हो गया। बाद में, 10 अक्टूबर, 2025 को ED ने फिर से सुजीत के ऑफिस, सुजीत के बेटे समुद्र के ढाबे और उनके करीबी लोगों के घरों पर छापा मारा।
ED का दावा है कि इन छापों से कई 'जरूरी' डॉक्यूमेंट्स मिले हैं। समुद्र, सुजीत की बहू और परिवार के दूसरे सदस्यों को भी ED ने पहले बुलाया था। उनके बयान भी रिकॉर्ड किए गए थे। जांच करने वालों का दावा है कि उनके बयान सुजीत के बयानों से मैच किये गये। जांच करने वालों ने बैंक ट्रांजैक्शन और IT रिटर्न से जुड़े कई डॉक्यूमेंट्स की भी जांच की।
सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में सुजीत बसु को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। ईडी का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और जैसे-जैसे दस्तावेजों और बयानों का विश्लेषण आगे बढ़ेगा, इस मामले में और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। फिलहाल यह मामला राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है, क्योंकि जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और कई और नाम भी रडार पर हैं।