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शादी समारोहों की 'चमक' के पीछे छिपा था खौफनाक सच, डांस और शोहरत के नाम पर शोषण, गोपालगंज पुलिस का बड़ा एक्शन

चमक के पीछे छिपे कथित शोषण और बाल तस्करी के नेटवर्क का खुलासा होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी है। पुलिस ने 40 से अधिक नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया है।

By लखन भारती

May 12, 2026 19:18 IST

गोपालगंज(बिहार): बिहार की गोपालगंज पुलिस ने ऑर्केस्ट्रा नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 40 से अधिक नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया है और बाल तस्करी व शोषण के आरोप में 22 लोगों को गिरफ्तार किया है। गोपालगंज पुलिस की ओर से ऑर्केस्ट्रा नेटवर्क के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार, इस ऑपरेशन का नेतृत्व खुद एसपी विनय तिवारी कर रहे थे। अभियान में कुचायकोट थाना पुलिस, पटना पुलिस मुख्यालय, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन और नारायणी सेवा संस्थान की टीम शामिल रही।

कई राज्यों से तस्करी कर लाई गईं लड़कियां

बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान जिले के 15 ऑर्केस्ट्रा समूहों पर कार्रवाई की गई है। इन ऑर्केस्ट्रा ग्रुप्स से बचाई गई बच्चियों की उम्र 10 से 17 वर्ष के बीच बताई गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कई लड़कियों की तस्करी पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत विभिन्न राज्यों से की गई थी। उन्हें शादी समारोहों में अश्लील भोजपुरी गानों पर घंटों नृत्य करने के लिए मजबूर किया जाता था। आरोप है कि कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी उनका यौन शोषण जारी रहता था।

एक महीने से चल रही थी निगरानी

जानकारी के अनुसार, बीते एक महीने तक चले निगरानी अभियान के दौरान स्वयंसेवी संस्थाओं ने इस नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रखी थी। जांच में पता चला कि शादी के मौसम में पड़ोसी राज्यों से नाबालिग लड़कियों को लाकर ऑर्केस्ट्रा समूहों में शामिल किया जाता था। कई बच्चियों ने काउंसिलिंग के दौरान बताया कि उन्हें बेहतर जिंदगी, पैसे और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में अवसर दिलाने का झांसा देकर इस नेटवर्क में फंसाया गया। कुछ बच्चियों ने यह भी कहा कि उनके तथाकथित प्रेमियों ने उन्हें बेच दिया था।

मेडिकल जांच जारी, संचालकों में हड़कंप

फिलहाल इन सभी लड़कियों को मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल लाने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं इस कार्रवाई के बाद जिलेभर के ऑर्केस्ट्रा संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि समाज और परिवारों के सामने खड़े उस बड़े खतरे का भी संकेत है, जहां लालच, झूठे सपने और मजबूरी के बीच मासूम बच्चियां शोषण का शिकार बन जाती हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि जागरूकता और सामाजिक सतर्कता भी बेहद जरूरी है।

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