नई दिल्ली: कपूर परिवार की संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद ने अब सुप्रीम कोर्ट में नया मोड़ ले लिया है। 80 वर्षीय रानी कपूर ने शीर्ष अदालत में नई याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि प्रिया सचदेव कपूर और कुछ अन्य लोग ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ तथा उससे जुड़ी कंपनियों के संचालन में हस्तक्षेप कर रहे हैं। रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट से 18 मई को प्रस्तावित बोर्ड बैठक पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह बैठक परिवार की विवादित संपत्तियों और कंपनी के वित्तीय नियंत्रण पर कब्जा करने की कोशिश का हिस्सा है।
मंगलवार को यह मामला जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अगुवाई वाली बेंच के सामने उल्लेखित किया गया। सुनवाई के दौरान रानी कपूर की ओर से पेश वकील ने कहा कि प्रस्तावित बोर्ड बैठक में अतिरिक्त निदेशकों की नियुक्ति की योजना है। इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हम अब एक ऐसे अखाड़े में प्रवेश कर चुके हैं, जहां महाभारत भी छोटी लगेगी।” कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 मई के लिए तय की है।
‘मध्यस्थता प्रक्रिया को निष्प्रभावी करने की कोशिश’
याचिका में कहा गया है कि रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (RIPL) की ओर से 8 मई को जारी नोटिस के तहत बुलाई गई बोर्ड बैठक सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुरू कराई गई मध्यस्थता प्रक्रिया को कमजोर करने के उद्देश्य से की जा रही है।
रानी कपूर का आरोप है कि प्रिया सचदेव कपूर और अन्य लोग कंपनी के प्रबंधन, वित्तीय नियंत्रण और विवादित पारिवारिक संपत्ति पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे अदालत की मध्यस्थता प्रक्रिया निष्प्रभावी हो सकती है।
‘फर्जी ट्रस्ट के जरिए छीनी गई विरासत’
याचिका में रानी कपूर ने दावा किया है कि ‘आरके फैमिली ट्रस्ट’ या ‘रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट’ नामक एक कथित फर्जी दस्तावेज के जरिए उन्हें उनकी विरासत, संपत्ति और घर से वंचित कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट डीड में उन्हें सेटलर और ट्रस्टी बताया गया है, लेकिन लाभार्थियों के तौर पर केवल प्रिया सचदेव कपूर और कुछ अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। इससे कपूर परिवार के अन्य सदस्यों को बाहर रखा गया।
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प्रिय सचदेव कपूर को हटाने का दावा
रानी कपूर ने यह भी दावा किया कि 21 मार्च 2026 को जारी एक पत्र के माध्यम से उन्होंने प्रिया सचदेव कपूर को ट्रस्टी पद से हटा दिया था। उनके मुताबिक यह अधिकार उन्हें ट्रस्ट डीड के तहत प्राप्त था।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 7 मई के उस आदेश का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा गया था। पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया गया है। रानी कपूर का कहना है कि अदालत द्वारा मध्यस्थता का आदेश दिए जाने के 24 घंटे के भीतर ही बोर्ड बैठक का नोटिस जारी कर दिया गया। अब इस हाई-प्रोफाइल पारिवारिक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 14 मई को होगी, जिस पर सबकी नजरें टिकी हैं।