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अडानी समूह के साथ साझेदारी में उबर बनाएगी भारत का अपना पहला डाटा सेंटर, तकनीकी विस्तार को मिलेगा बढ़ावा

भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम, उबर का पहला डाटा सेंटर इसी साल होगा तैयार।

By रजनीश प्रसाद

May 13, 2026 16:26 IST

अहमदाबाद : कैब सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी उबर ने भारत में अपना पहला डाटा सेंटर स्थापित करने के लिए अडानी समूह के साथ साझेदारी की है। इसे भारत में कंपनी की तकनीकी और नवाचार गतिविधियों के बड़े विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।

उबर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दारा खोसरोशाही ने बुधवार को अहमदाबाद में अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया के जरिए इस समझौते की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से उबर के लिए एक प्रमुख नवाचार केंद्र बनता जा रहा है और इसी कारण कंपनी देश में अपना पहला डाटा सेंटर शुरू करने जा रही है।

कंपनी के मुताबिक यह डाटा सेंटर इसी वर्ष के अंत तक तैयार हो जाएगा। इसका उपयोग नई तकनीकों के परीक्षण और उन्हें लागू करने के लिए किया जाएगा। साथ ही भारत से दुनिया भर के लिए तकनीकी समाधान विकसित करने में भी यह केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

दारा खोसरोशाही ने कहा कि यह निवेश “भारत से दुनिया के लिए” बड़े स्तर पर तकनीकी विकास को बढ़ावा देगा। यह घोषणा उनके भारत दौरे के दौरान की गई।

इससे पहले अक्टूबर महीने में अडानी एंटरप्राइजेज की संयुक्त उद्यम कंपनी अडानीकॉननेक्स ने गूगल के साथ मिलकर भारत के सबसे बड़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डाटा सेंटर परिसर और हरित ऊर्जा ढांचे को विकसित करने की योजना बनाई थी। यह परियोजना आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में तैयार की जा रही है।

गूगल के प्रस्तावित कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र में वर्ष 2026 से 2030 के बीच करीब 15 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का अनुमान है। इस परियोजना में बड़े स्तर पर डाटा सेंटर संचालन, समुद्र के भीतर केबल संपर्क व्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा ढांचा शामिल होगा जिससे भारत में उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक को मजबूती मिलेगी।

यह परियोजना भारती एयरटेल और अडानीकॉननेक्स जैसे सहयोगी साझेदारों के साथ मिलकर विकसित की जा रही है। इसका उद्देश्य भारत की कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाना और देश की कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमता को मजबूत करना है।

परियोजना के तहत बिजली प्रसारण ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा भंडारण प्रणाली में भी निवेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे न केवल डाटा सेंटर के संचालन को सहायता मिलेगी बल्कि भारत के बिजली ग्रिड की क्षमता और स्थिरता भी मजबूत होगी।

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