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अखिलेश यादव के भाई प्रतीक की संदिग्ध मौत, यादव परिवार में शोक की लहर

सुबह अस्पताल पहुंचा शव, मौत पर उठे सवाल: अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव की संदिग्ध मौत से सियासी गलियारों में हलचल।

By श्वेता सिंह

May 13, 2026 09:22 IST

लखनऊः समाजवादी राजनीति के सबसे चर्चित परिवारों में से एक यादव परिवार एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह बेहद दुखद और रहस्यमयी है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के छोटे बेटे और अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के सौतेले भाई प्रतीक यादव (Prateek Yadav) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है।

सूत्रों के अनुसार बुधवार सुबह करीब छह बजे प्रतीक यादव को लखनऊ के सिविल अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में विषाक्तता यानी जहर से मौत की आशंका जताई जा रही है, हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया है। मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे। उनकी पत्नी अपर्णा यादव (Aparna Yadav) भारतीय जनता पार्टी की नेता हैं और उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। अपर्णा यादव पहले समाजवादी पार्टी से जुड़ी थीं, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गईं। यही कारण था कि प्रतीक यादव का नाम अक्सर राजनीतिक चर्चाओं में बना रहता था, भले ही उन्होंने खुद कभी सक्रिय राजनीति में कदम नहीं रखा।

यादव परिवार की राजनीतिक विरासत से अलग प्रतीक ने कारोबार और फिटनेस की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में उनका रियल एस्टेट और फिटनेस से जुड़ा व्यवसाय था। सोशल मीडिया पर भी उनकी फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन की कहानी काफी चर्चित रही। बताया जाता है कि उन्होंने अपने वजन को 103 किलो से घटाकर 67 किलो तक पहुंचाया था। उनकी फिटनेस यात्रा को लेकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी मिली थी।

प्रतीक यादव को पशु प्रेमी और शांत स्वभाव के व्यक्ति के रूप में भी जाना जाता था। राजनीति से दूरी बनाए रखने के बावजूद समाजवादी पार्टी के भीतर कई बार उन्हें सक्रिय राजनीति में लाने की चर्चा हुई। 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान उनके चुनाव लड़ने की अटकलें भी तेज हुई थीं, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक राजनीतिक जीवन से दूरी बनाए रखी।

अब उनकी अचानक और रहस्यमयी मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ एक हादसा है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश छिपी है, इसका जवाब फिलहाल जांच एजेंसियों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिका हुआ है।

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