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पश्चिम एशिया युद्ध के बीच चीन को फायदा, सल्फ्यूरिक एसिड की वैश्विक आपूर्ति संकट में

सल्फ्यूरिक एसिड संकट ने उद्योगों को चुनौती दी, अमेरिका और कनाडा को लाभ

बीजिंग : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति पर संकट पैदा हो गया है। लेकिन इसके अलावा दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले रासायनिक पदार्थ सल्फ्यूरिक एसिड की भी कमी देखी जा रही है। इसी कमी का लाभ चीन उठा रहा है। सल्फ्यूरिक एसिड का इस्तेमाल लगभग हर उद्योग में किया जाता है—खाद्य प्रसंस्करण से लेकर जल शोधन, कृषि से लेकर भारी उद्योग तक। तेल और गैस को परिशोधित करने के दौरान उपज के रूप में सल्फर प्राप्त होता है जिसे जलाकर सल्फ्यूरिक एसिड तैयार किया जाता है।

पश्चिम एशियाई देश दुनिया में सबसे अधिक मात्रा में सल्फ्यूरिक एसिड का निर्यात करते हैं। लेकिन हर्मुज़ जलडमरूमध्य में जारी अस्थिरता के कारण यह आपूर्ति लगभग बंद हो गई है। वही चीन ने अपने आंतरिक बाजार की मांग को पूरा करने के लिए सल्फ्यूरिक एसिड के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसका सीधा प्रभाव एशिया समेत कई देशों में देखा जा रहा है। पार्सियन गल्फ में युद्ध के कारण सल्फ्यूरिक एसिड की कीमत में भी वृद्धि हुई है।

भारत की अर्थव्यवस्था का एक अहम स्तंभ कृषि है। OEC के आंकड़ों के अनुसार 2024 में भारत ने चीन से लगभग ₹227 करोड़ का सल्फ्यूरिक एसिड आयात किया है। इसकी कीमत बढ़ने पर उर्वरक की कीमत भी बढ़ जाएगी जिससे किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है।

सल्फ्यूरिक एसिड का उपयोग केवल कृषि में ही नही बल्कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में भी किया जाता है। पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड के संरक्षण में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। कीमत बढ़ने से खाद्य सामग्री की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है।

सल्फ्यूरिक एसिड धातु, कागज, कंप्यूटर चिप, बैटरी, रबर उद्योग और बड़ी जल शोधन परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण है। इसके अभाव के कारण हार्डवेयर, आईटी और विभिन्न भारी उद्योग प्रभावित हो सकते हैं।

बाजार और व्यापार विशेषज्ञ फ्रेडा गॉर्डन ने वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि चीन अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और उर्वरक की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए इस कदम को उठा रहा है। हालांकि इसका असर वैश्विक स्तर पर उर्वरक उत्पादन में कमी और खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतों के रूप में दिखाई देगा।

विशेष रूप से चिली और इंडोनेशिया इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। चिली में तांबा उत्पादन प्रभावित हुआ है और इंडोनेशिया में सल्फर की कीमत में 80 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। नाइकेल का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी और स्टेनलेस स्टील उद्योग में होता है। इस कमी के कारण नाइकेल उत्पादन में भी कटौती की जा रही है।

कुणाल सिन्हा, व्यापार विशेषज्ञ ने कहा कि सल्फ्यूरिक एसिड अत्यधिक दाहक होने के कारण इसका परिवहन और भंडारण मुश्किल और महंगा है। अधिकांश उद्योग इसे केवल कुछ सप्ताह के लिए भंडारित रखते हैं। किसी भी प्रकार की हड़ताल या हर्मुज़ जलडमरूमध्य की अस्थिरता का असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा सकता है।

इस संकट से अमेरिका और कनाडा जैसे देश भी लाभ उठा रहे हैं। अमेरिका कनाडा और मेक्सिको से कम कीमत में सल्फ्यूरिक एसिड आयात करता है। इसके अलावा, अमेरिका में कई तेल शोधनगृहों में भी सल्फर का उत्पादन होता है। कनाडा की इवानहोई माइंस वर्तमान में सल्फ्यूरिक एसिड बेचकर रोजाना लगभग $1 मिलियन (भारत में ₹8.6 करोड़) कमा रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सल्फ्यूरिक एसिड की आपूर्ति में कमी के कारण उर्वरक, धातु, जल शोधन और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में बड़े पैमाने पर प्रभाव पड़ेगा।

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