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कोविड में कारोबार ठप, फिर भी करोड़ों का लेनदेन ! ED की जांच में फंसे सुजीत बसु

कोविड काल में रेस्टोरेंट बंद होने के बावजूद करोड़ों की एंट्री का दावा, नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़े पैसों की परतें खोल रही जांच एजेंसी।

कोलकाताः कोविड लॉकडाउन के दौरान जब देशभर में कारोबार ठप थे, उसी समय पश्चिम बंगाल के पूर्व दमकल मंत्री सुजीत बसु और उनके परिवार के नाम पर चल रहे रेस्टोरेंट्स के बैंक खातों में करोड़ों रुपये के लेनदेन का मामला सामने आया है। यह दावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में किया है।

ईडी के अनुसार, जांच में पाया गया कि एक चाइनीज रेस्टोरेंट, एक ढाबा और एक बार-कम-रेस्टोरेंट-जो कोविड के दौरान बंद बताए जा रहे हैं-उनके खातों में लगातार बड़ी रकम जमा होती रही। अकेले एक रेस्टोरेंट खाते में लगभग 1.11 करोड़ रुपये और दूसरे कारोबार से जुड़े खाते में करीब 1.20 करोड़ रुपये का लेनदेन दर्ज किया गया।

जांच एजेंसी ने सवाल उठाया है कि जब इन प्रतिष्ठानों में कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो रही थी, तब इतनी बड़ी रकम का स्रोत क्या था? ईडी का कहना है कि इस पूरे मामले में 15 फर्जी कंपनियों की भूमिका सामने आई है, जिनके जरिए कथित तौर पर धन का प्रवाह रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायों तक पहुंचाया गया।

ईडी ने अदालत में यह भी दावा किया कि यह पैसा सिर्फ व्यावसायिक आय नहीं, बल्कि नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़े अवैध धन का हिस्सा हो सकता है। जांच में संकेत मिले हैं कि दक्षिण दमदम नगर पालिका में ग्रुप-सी और ग्रुप-डी पदों पर हुई कथित अनियमित नियुक्तियों से जुड़े पैसे को विभिन्न माध्यमों से घुमाया गया।

एजेंसी के अनुसार, पिछले कई वर्षों में सुजीत बसु और उनके परिवार के खातों में बार-बार करोड़ों रुपये के लेनदेन हुए हैं। इनमें 1.6 करोड़, 3.67 करोड़ और 1.8 करोड़ रुपये जैसे बड़े ट्रांजैक्शन शामिल हैं। ईडी का कहना है कि इन पैसों के वैध स्रोत का कोई स्पष्ट दस्तावेज अब तक नहीं मिला है।

जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर नौकरी दिलाने के बदले उम्मीदवारों से जमीन और संपत्ति ली गई। कुछ मामलों में संपत्ति ‘उपहार’ के रूप में दी गई, ऐसा भी दावा ईडी ने किया है।

सोमवार को पूछताछ के बाद ED ने सुजीत बसु को गिरफ्तार किया था। मंगलवार को अदालत में पेशी के दौरान एजेंसी ने तर्क दिया कि जमानत मिलने पर डिजिटल सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने का खतरा है। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए उन्हें 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया।

दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने दलील दी कि सीबीआई की चार्जशीट में सुजीत बसु का नाम नहीं है और कई वर्षों बाद गिरफ्तारी पर सवाल उठाए।

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