मॉस्को: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि भारत को ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े सभी समझौतों को हर हाल में पूरा किया जाएगा, भले ही बाहरी स्तर पर अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़े। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और रूस के संबंध गहरी मित्रता पर आधारित हैं और दोनों देशों के रास्ते अलग होने की कोई संभावना नहीं है।
नई दिल्ली की अपनी इस सप्ताह होने वाली यात्रा से पहले ‘रूस टुडे-इंडिया’ को दिए साक्षात्कार में लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि मोदी दुनिया के सबसे ऊर्जावान नेताओं में शामिल हैं।
लावरोव ने कहा, “मैं भरोसा दिलाता हूं कि रूसी आपूर्ति से जुड़े भारत के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। हम यह सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे कि यह अनुचित और बेईमान प्रतिस्पर्धा हमारे समझौतों पर असर न डाले।ऊर्जा आपूर्ति के मामले में रूस ने कभी भी भारत या किसी अन्य देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन नहीं किया है। कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र हमारा प्रमुख प्रोजेक्ट है। यह भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। इस परमाणु परियोजना की नई इकाइयों के निर्माण में सहयोग लगातार जारी है। इसके बावजूद भारत की आवश्यकताएं और बढ़ रही हैं। हम गैस, तेल और कोयले जैसे हाइड्रोकार्बन की आपूर्ति भी जारी रखे हुए हैं।”
उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में रूस की तकनीकी सहायता से कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। इसकी शुरुआत मार्च 2002 में हुई थी। फरवरी 2016 से इस संयंत्र की पहली इकाई 1,000 मेगावाट की निर्धारित क्षमता पर लगातार काम कर रही है। रूसी सरकारी मीडिया के अनुसार यह परियोजना 2027 तक पूरी क्षमता के साथ संचालन शुरू कर देगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा करते हुए लावरोव ने कहा कि वे दुनिया के सबसे ऊर्जावान नेताओं में से एक हैं। मोदी अपनी ऊर्जा का उपयोग अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति, रक्षा, संस्कृति और भारत की अद्वितीय सभ्यतागत विरासत को सुरक्षित रखने जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को हासिल करने में कर रहे हैं। भारत-रूस संबंधों पर लावरोव ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते दोस्ती की मजबूत नींव पर टिके हैं और ऐसा कोई परिदृश्य नहीं है जिसमें दोनों देशों के रास्ते अलग हों।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ताकतें दोनों देशों के संबंधों को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। कुछ देश बंद ढांचे तैयार कर रहे हैं और रूस के साथ संबंधों को लेकर अपने नियम थोपने का प्रयास कर रहे हैं। हम यह सब देख रहे हैं और हमारे भारतीय मित्र भी इससे परिचित हैं। यही कारण है कि इन कोशिशों का लगातार विफल होना और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।