कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में लंबे समय से चल रहे अवैध कोयला, बालू और पत्थर खनन के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि खनिजों की अवैध निकासी और तस्करी को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस अवैध कारोबार ने राज्य को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया है और पर्यावरण व जनजीवन पर गंभीर असर डाला है।
सरकारी निर्देश के बाद प्रशासन तेजी से सक्रिय हो गया है। मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने सभी जिलाधिकारियों से उनके क्षेत्रों में मौजूद अवैध कोयला खदानों की विस्तृत जानकारी तलब की है। इन रिपोर्टों के आधार पर जल्द ही राज्यभर में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू होने की संभावना है।
कई जिलों में फैला अवैध खनन का नेटवर्क
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बर्धमान के आसनसोल-रानीगंज क्षेत्र, बांकुड़ा, पुरुलिया और बीरभूम में वर्षों से अवैध कोयला खनन का नेटवर्क सक्रिय है। आरोप है कि पूर्ववर्ती प्रशासनिक ढिलाई और राजनीतिक संरक्षण के कारण यह कारोबार लगातार बढ़ता गया।
स्थिति इतनी गंभीर रही कि कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद कई स्थानों पर अवैध खनन पूरी तरह बंद नहीं हो सका। कई बंद खदानों से भी अवैध निकासी की शिकायतें सामने आईं, जिससे दुर्घटनाओं और पर्यावरणीय जोखिम में बढ़ोतरी हुई।
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पर्यावरण और बुनियादी ढांचे पर असर
अवैध खनन और ओवरलोडिंग का असर राज्य के सड़क नेटवर्क पर भी पड़ा है। कई क्षेत्रों में सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। वहीं बालू और पत्थर के अनियंत्रित खनन से नदियों का स्वरूप बदल रहा है और प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।
अध्ययनों के अनुसार, पश्चिम बर्धमान में पिछले तीन दशकों में खनन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जबकि वन क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है।
राजस्व नुकसान और जांच एजेंसियों की कार्रवाई
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अवैध खनन के कारण राज्य को भारी राजस्व हानि उठानी पड़ी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कोयला तस्करी से जुड़े मामलों में अब तक करोड़ों रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
असनसोल-रानीगंज क्षेत्र में हजारों अवैध खदानों के सक्रिय होने की बात भी सामने आती रही है, जहां कई बार हादसों में जान-माल का नुकसान भी हुआ है।
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बालू और स्टोन क्रशर पर भी निगरानी
सरकार अब केवल कोयला ही नहीं, बल्कि अवैध बालू खनन और स्टोन क्रशर यूनिट्स पर भी कार्रवाई की तैयारी में है। बीरभूम, पूर्व और पश्चिम बर्धमान, मिदनापुर और झाड़ग्राम में फर्जी चालानों के जरिए अवैध निकासी के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं।
इन गतिविधियों से न केवल राजस्व को नुकसान हुआ है, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रदूषण और सामाजिक समस्याएं भी बढ़ी हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
पर्यावरण कार्यकर्ता और पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अधिकारी विश्वजीत मुखोपाध्याय ने सरकार के कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ा है और स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलकर इस अभियान को प्रभावी बनाएंगे।
‘100 रुपये का राजस्व, 99 पर नहीं समझौता’
हाल ही में प्रशासनिक बैठक में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य को मिलने वाले राजस्व में किसी भी तरह की कमी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जहां 100 रुपये संभव हैं, वहां 99 रुपये पर भी समझौता नहीं होगा।
सरकार आने वाले दिनों में इस अभियान को और तेज करने की तैयारी में है, जिससे अवैध खनन और तस्करी पर निर्णायक रोक लगाई जा सके।