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‘इस बार मेडिकल सीट पक्की थी’, प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा रद्द होने से टूट गया नीट अभ्यर्थी

नीट पेपर लीक विवाद के बीच छात्र की आत्महत्या, परीक्षा व्यवस्था पर फिर उठे गंभीर सवाल।

By रजनीश प्रसाद

May 14, 2026 19:42 IST

लखनऊ : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) प्रश्नपत्र लीक मामले ने गुरुवार को बेहद दुखद मोड़ ले लिया। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में 21 वर्षीय नीट अभ्यर्थी हृतिक मिश्रा ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिवार का आरोप है कि परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की खबर से वह गहरे मानसिक तनाव में चले गए थे।

हृतिक इससे पहले दो बार नीट-यूजी परीक्षा दे चुके थे लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। वर्ष 2026 में उन्होंने तीसरी बार परीक्षा दी थी। परिवार के अनुसार इस बार उनकी परीक्षा बहुत अच्छी हुई थी और उन्हें पूरा भरोसा था कि इस बार उन्हें मेडिकल कॉलेज में सीट मिल जाएगी लेकिन प्रश्नपत्र लीक की खबर और परीक्षा रद्द होने की घोषणा ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया।

बुधवार रात हृतिक ने कथित तौर पर अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। गुरुवार सुबह जब परिवार वालों ने कमरे का दरवाजा खोला तो उनका शव फंदे से लटका मिला। हृतिक के पिता का कहना है कि प्रश्नपत्र लीक के बाद पैदा हुई अनिश्चितता और मानसिक दबाव के कारण उनके बेटे ने यह कठोर कदम उठाया।

हृतिक के करीबी दोस्तों ने भी बताया कि प्रश्नपत्र लीक की घटना के बाद छात्रों के बीच भारी निराशा और चिंता का माहौल है। कई परीक्षार्थी भविष्य को लेकर तनाव में हैं।

इसी बीच मंगलवार रात गोवा से भी एक नीट अभ्यर्थी की आत्महत्या की खबर सामने आई थी। हालांकि उस घटना का परीक्षा रद्द होने से कोई सीधा संबंध है या नहीं यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। गोवा की घटना का उल्लेख करते हुए आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने सामाजिक माध्यम पर नाराजगी जताई और पूरी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।

फिलहाल इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा तो हो चुकी है लेकिन दोबारा परीक्षा कब होगी इसकी नई तारीख अब तक घोषित नहीं की गई है। ऐसे में लाखों छात्र असमंजस और चिंता के बीच इंतजार कर रहे हैं।

मनोवैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का कहना है कि वर्षों की तैयारी के बाद अचानक पैदा हुई यह अनिश्चितता छात्रों पर भारी मानसिक दबाव डाल रही है। उनका मानना है कि सरकार और संबंधित एजेंसियों को जल्द स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए नहीं तो विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।

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