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सर्वार्थ सिद्धि योग क्या है ? यह योग कब शुभ, कब अशुभ फल देता है ?

सामान्य रूप से शुभ माने जाने वाले सर्वार्थ सिद्धि योग क्या हमेशा शुभ रहते हैं ? जानें कि किन परिस्थितियों में सर्वार्थ सिद्धि योग अशुभ फल देता है।

वैदिक ज्योतिष में कई शुभ योगों का उल्लेख है। इनमें से एक है सर्वार्थ सिद्धि योग। यह अत्यंत शक्तिशाली और महत्वपूर्ण योग है। नाम से ही समझा जा सकता है कि सर्वार्थ सिद्धि योग अत्यंत शुभ है और इसके फलस्वरूप मन की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करना संभव होता है। लेकिन क्या वास्तव में सर्वार्थ सिद्धि योग हमेशा शुभ फल देता है? कभी-कभी यह योग अत्यंत अशुभ और हानिकारक भी हो सकता है। विस्तार से जानिए।

सर्वार्थ सिद्धि योग क्या है ?

निर्धिष्ट दिन पर निर्धारित नक्षत्रों के संयोग से सर्वार्थ सिद्धि योग बनता है। उदाहरण के लिए, यदि सोमवार को मृगशिरा, पुष्य, रोहिणी, अनुराधा या श्रवण नक्षत्र हैं, तो सर्वार्थ सिद्धि योग बनता है। इसी तरह मंगलवार को अश्विनी, अनुराधा, हस्त, कृत्तिका नक्षत्र होना शुभ है। फिर भी बुधवार को मृगशिरा नक्षत्र होना शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, सर्वार्थ सिद्धि योग में कोई भी कार्य करने पर उसका शुभ परिणाम मिलता है। नई नौकरी में शामिल होना, नया व्यवसाय शुरू करना या पढ़ाई में किसी कोर्स में प्रवेश लेना, इस योग में करने पर सफलता प्राप्त की जा सकती है।

सर्वार्थ सिद्धि योग कब अशुभ है ?

सामान्यत: सर्वार्थ सिद्धि योग अत्यंत शुभ होता है, फिर भी कभी-कभी यह योग अशुभ परिणाम देता है। किसी महीने की द्वादशी या एकादशी तिथि में सर्वार्थ सिद्धि योग बनना अशुभ माना जाता है। मंगलवार या शनिवार को सर्वार्थ सिद्धि योग बनना भी अशुभ होता है। इस समय लोहे की कोई वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए। अशुभ सर्वार्थ सिद्धि योग में विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा करना उचित नहीं है। यदि गुरु पुष्य योग के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग बनता है, तो यह अत्यंत अशुभ होता है। शनिवार को रोहिणी नक्षत्र में सर्वार्थ सिद्धि योग अत्यंत अशुभ माना जाता है।

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