बेंगलुरुः कर्नाटक सरकार ने केंद्र सरकार से मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG को 2026 से समाप्त करने और राज्यों को अपनी प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का अधिकार वापस देने की मांग दोहराई है। राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. शरण प्रकाश पाटिल ने कहा कि कर्नाटक की CET प्रणाली छात्रों के लिए अधिक भरोसेमंद, पारदर्शी और मेरिट आधारित मॉडल साबित हुई है।
बेंगलुरु में आयोजित प्रेस वार्ता में मंत्री ने हालिया NEET पेपर लीक मामले को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित परीक्षा में हर साल किसी न किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, जिससे लाखों छात्र और अभिभावक मानसिक दबाव झेलते हैं।
डॉ. पाटिल ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक, फर्जी उम्मीदवार, संगठित नकल और तकनीकी अनियमितताओं ने NEET की विश्वसनीयता को कमजोर किया है। उन्होंने इस मामले में संबंधित केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग की और अदालत की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की बात कही।
उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे मामले में प्रभावशाली लोगों की भूमिका होने की आशंका है। मंत्री के मुताबिक, मेडिकल सीटों की खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के घोटालों को अंजाम दिया जा सकता है।
मंत्री ने कहा कि कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) दशकों से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से CET आयोजित करता आ रहा है। इस मॉडल ने ग्रामीण, मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लाखों छात्रों को योग्यता के आधार पर अवसर उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि चिकित्सा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त होनी चाहिए। राज्यों पर ऐसी केंद्रीकृत परीक्षा थोपना उचित नहीं है, जिस पर लगातार सवाल उठते रहे हों।
डॉ. पाटिल ने बताया कि राज्य सरकार पहले ही केंद्र को पत्र लिखकर NEET समाप्त करने और CET के जरिए मेडिकल प्रवेश की अनुमति देने की मांग कर चुकी है। उन्होंने केंद्र से संघीय ढांचे का सम्मान करते हुए राज्यों को अपनी विश्वसनीय एजेंसियों के माध्यम से परीक्षा आयोजित करने की अनुमति देने का आग्रह किया।