नई दिल्ली: CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के नतीजे आने के बाद बोर्ड की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली चर्चा में आ गई है। इस बार पहली बार देशभर में छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पूरी तरह ऑनलाइन की गई। बोर्ड ने दावा किया था कि इससे मूल्यांकन ज्यादा पारदर्शी होगा और नंबर जोड़ने जैसी गलतियां कम होंगी, लेकिन रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों ने कम अंक मिलने की शिकायत की।
खासतौर पर भौतिकी, गणित, लेखाशास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे विषयों में छात्रों ने उम्मीद से कम नंबर मिलने पर सवाल उठाए। जब पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू हुई और छात्रों को उनकी स्कैन की गई कॉपियां दिखाई गईं, तब कई समस्याएं सामने आईं।
छात्रों का कहना है कि कई उत्तर पुस्तिकाएं धुंधली थीं और लिखावट साफ दिखाई नहीं दे रही थी। कुछ जगहों पर उत्तर पूरी तरह पढ़े नहीं जा रहे थे। ऐसे में छात्रों ने सवाल किया कि जब कॉपी ठीक से दिखाई ही नहीं दे रही, तो उसकी सही जांच कैसे हुई होगी।
कई छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि गणित जैसे विषयों में स्टेप मार्किंग नहीं दी गई और कुछ उत्तरों को चेक ही नहीं किया गया। दूसरी तरफ री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर भी तकनीकी दिक्कतें देखने को मिलीं। फीस जमा करते समय वेबसाइट का बार-बार बंद होना, कॉपियां डाउनलोड न होना और पोर्टल का क्रैश होना छात्रों के लिए परेशानी का कारण बना।
बताया गया कि इस साल 1.27 लाख से ज्यादा छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया, जिससे सिस्टम पर दबाव बढ़ गया। बाद में CBSE ने स्कैन कॉपी की फीस घटाकर 100 रुपये और प्रति प्रश्न री-इवैल्यूएशन शुल्क 25 रुपये कर दिया।
हालांकि बोर्ड ने छात्रों के आरोपों को गलत बताया है। CBSE का कहना है कि स्कैनिंग और मूल्यांकन कई स्तरों पर जांच के बाद किया गया। बोर्ड के मुताबिक इस साल लगभग 9.86 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं की जांच ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के जरिए की गई।
बढ़ती शिकायतों को देखते हुए बोर्ड ने पुनर्मूल्यांकन की तारीख भी बढ़ा दी है। अब छात्र 19 से 22 मई तक स्कैन कॉपी और 26 से 29 मई तक री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को और बेहतर बनाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में छात्रों को ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।