नई दिल्लीः पहलवान विनेश फोगाट की पात्रता को लेकर चल रहा विवाद अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने 9 मई को उन्हें एक शो-कॉज नोटिस जारी किया था, जिसके बाद यह पूरा मामला विवादों में आ गया।
डब्ल्यूएफआई ने आरोप लगाया कि 2024 समर ओलंपिक के दौरान विनेश फोगाट वजन सीमा पूरी नहीं कर सकीं, एंटी-डोपिंग नियमों के तहत लोकेशन संबंधी अनुपालन में चूक हुई और ओलंपिक क्वालिफायर ट्रायल में उन्होंने दो अलग-अलग भार वर्गों में हिस्सा लिया।
इसके साथ ही महासंघ ने यह भी तर्क दिया कि एंटी-डोपिंग नियमों के तहत किसी खिलाड़ी के रिटायरमेंट के बाद छह महीने का इंतजार करना जरूरी होता है, इसलिए उनकी तत्काल वापसी संभव नहीं है।
हाईकोर्ट का रुख
इस मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने डब्ल्यूएफआई के फैसले पर सवाल उठाए। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि चयन मानदंड इस मामले में बदले गए हैं।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी विवाद का असर खेल पर नहीं पड़ना चाहिए और कुश्ती जैसे खेल को इससे नुकसान नहीं होना चाहिए। साथ ही अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मातृत्व को देश में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है और ऐसे मामलों में निष्पक्षता जरूरी है।
आखिर मामला क्या है?
विनेश फोगाट ने पेरिस ओलंपिक में अयोग्य घोषित होने के बाद कुश्ती से संन्यास लिया था। इसके बाद जुलाई 2025 में उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया और फिर 12 दिसंबर 2025 को खेल में वापसी की घोषणा की।
इसके बावजूद डब्ल्यूएफआई ने उन्हें अयोग्य माना, लेकिन उन्होंने गोंडा में आयोजित नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट में भाग लिया और शो-कॉज नोटिस का जवाब देकर महासंघ के फैसले का विरोध किया।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि विनेश फोगाट पहले डब्ल्यूएफआई के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं। वह उन छह महिला पहलवानों में शामिल थीं जिन्होंने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और 2023 के पहलवान आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।