घर है या कोई राजमहल! चहारदीवारी से घिरा हुआ विशाल परिसर जिसके भीतर एक महल जैसा भवन। कोलकाता पुलिस के DCP शांतनु सिन्हा विश्वास की गिरफ्तारी के बाद उनके मुर्शिदाबाद के कांदी स्थित इस घर के बारे में पूरे राज्य में चर्चाएं तेज हो गयी हैं।
शुक्रवार की सुबह वहां एन्फोर्समेंट डिरेक्टोरेट (ED) की टीम पहुंच गयी है। ED सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कांदी नगरपालिका के वार्ड नंबर 9 में स्थित शांतनु सिन्हा विश्वास का घर एक नजर में किसी राजमहल जैसा प्रतीत होता है।
हालांकि घर का निर्माण कार्य अभी भी चल रहा है। उससे पहले ही पूरे परिसर को ऊंचे चहारदीवारी से घेर दिया गया था। पिछले एक सप्ताह से यह घर बंद पड़ा है। जब ED के जांचकर्ता वहां पहुंचे तो मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ था।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार कांदी के जीवंति इलाके में पहुंचते ही केंद्रीय बलों ने पूरे घर को घेर लिया। लेकिन मुख्य द्वार पर ताला लटका होने के कारण वे कुछ देर तक इंतजार करना पड़ा। आखिरकार ताला तोड़कर जांच अधिकारियों ने घर के अंदर प्रवेश किया गया।
पूरे घर के साथ-साथ आसपास के इलाके में तलाशी अभियान चलाया गया है। जांचकर्ताओं ने स्थानीय निवासियों से भी पूछताछ की। बताया जा रहा है कि इस दौरान कई अहम जानकारियां भी हाथ लगी हैं। पास ही जीवंति इलाके में शांतनु की बहन गौरी सिन्हा विश्वास का घर भी है। वह कांदी नगरपालिका की उप-उप प्रमुख हैं। हालांकि जानकारी के मुताबिक वह भी इस समय घर पर मौजूद नहीं थीं।
बता दें, 'सोना पप्पु' के साथ मिलकर जबरन वसूली और धोखाधड़ी, एनआरआई कोटे से मेडिकल एडमिशन और बालू तस्करी - इन तीन मामलों में चुनाव से पहले ही ED ने शांतनु सिन्हा विश्वास को तलब करना शुरू कर दिया था।
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आखिरकार चुनाव समाप्त होने के बाद 14 मई को वह कोलकाता स्थित CGO कॉम्प्लेक्स में पेश हुए। वहीं मैराथन पूछताछ के बाद जांचकर्ताओं ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। ED का आरोप है कि कोलकाता पुलिस के DCP कई सवालों के जवाब टाल गए। साथ ही आरोप लगाया गया है कि उन्होंने जानकारी छिपाई और जांच को भटकाने की कोशिश भी की।
शुक्रवार को कोलकाता के कसबा इलाके में शांतनु से जुड़े कोलकाता पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के घर पर भी ED ने छापेमारी की। साथ ही चक्रबेड़िया और पार्क स्ट्रीट स्थित एक कैफेटेरिया-सह-होटल में भी तलाशी अभियान चलाया गया। इसी दौरान मुर्शिदाबाद में शांतनु के पैतृक गांव के घर पर भी ED की टीम पहुंच गई। जांचकर्ताओं का मानना है कि एक सामान्य पुलिसकर्मी की आय से इस तरह के भव्य और महलनुमा घर के निर्माण का खर्च मेल नहीं खाता है।