ईस्ट बंगाल ने आखिरी बार 2003-04 सीजन में राष्ट्रीय लीग जीता था। उसके बाद से लंबा इंतजार। हालांकि इस दौरान कई घरेलू टूर्नामेंट जीते लेकिन राष्ट्रीय स्तर की बड़ी ट्रॉफी उनके हाथ नहीं लगी जिससे अक्सर उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वी मोहन बगान (Mohun Bagan) से आलोचना भी सुननी पड़ी। आई-लीग के बाद ISL में भी यही स्थिति रही। लेकिन इस बार का ISL सीजन पूरी तरह से ईस्ट बंगाल (East Bengal) के नाम रहा।
फाइनल मुकाबले में इंटर काशी को 2-1 से हराकर ईस्ट बंगाल ने ISL का खिताब अपने नाम कर लंबे इंतजार के बाद आखिरकार ट्रॉफी जीत ली। इस एक ट्रॉफी ने कई तानों का जवाब और कई सवालों का उत्तर एक साथ दे दिया है।
ईस्ट बंगाल के Indian Super League (ISL) में शामिल होने के बाद जहां प्रतिद्वंद्वी मोहन बगान लगातार ट्रॉफियां जीतता रहा। वहीं लाल-पीली टीम के खाते में केवल सुपर कप ही आया। लगातार स्पॉन्सर और कोच बदलने के बावजूद टीम को वांछित सफलता नहीं मिल पा रही थी। हर सीजन में स्थिति ऐसी रही कि टीम को प्वाइंट टेबल के निचले हिस्से में ही रहना पड़ा और कई बार 8वें, 9वें या 10वें स्थान पर समाप्त करना पड़ा।
लेकिन टीम में ऑस्कर ब्रुजो (Oscar Bruzon) के आने के बाद समर्थकों में फिर से नए सपने देखने की शुरुआत हुई। उनसे पहले कार्लोस कुयाद्रत (Carlos Cuadrat) टीम को सुपर कप जिताते आए थे। ऑस्कर ब्रुजो के आने से खेल का पूरा ढांचा ही बदल गया।
इससे पहले उन्होंने बांग्लादेश के बसुंधरा किंग्स को भी चैंपियन बनाया था। खुद उन्होंने अपने पहले सीजन में कहा था कि उस समय टीम की स्थिति को देखते हुए बहुत कुछ करना संभव नहीं है। लेकिन पूरे सीजन का समय मिलने के बाद उन्होंने शानदार वापसी की और टीम लगातार जीत दर्ज करने लगी।
कई मैचों में बड़े अंतर से जीत हासिल की। सीजन की शुरुआत में पूर्व गोलकीपिंग कोच संदीप नंदी के साथ विवाद को लेकर भी उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा था। सुपर कप से पहले यह विवाद हुआ था और उस टूर्नामेंट में सफलता नहीं मिली, लेकिन उनका पूरा ध्यान ISL पर केंद्रित रहा।
ईस्ट बंगाल और इंटर काशी के बीच मुकाबले में ईस्ट बंगाल के सामने सीधा समीकरण था - जीत हासिल करनी थी। मैच की शुरुआत में ईस्ट बंगाल कुछ हद तक बिखरे हुए खेल के साथ उतरी। शुरुआत से ही टीम के पास गेंद पर नियंत्रण तो था लेकिन विपक्षी टीम के पास गेंद जाने पर उनका खेल कुछ अस्थिर नजर आ रहा था।
इसी का फायदा इंटर काशी ने उठाया और मैच में बढ़त बना ली। 14वें मिनट में अल्फ्रेड ने गेंद पाकर गोलकीपर के ऊपर से चिप कर शानदार गोल किया। इस दौरान ईस्ट बंगाल के डिफेंडर सही स्थिति में नहीं थे।
गोल खाने के बावजूद ईस्ट बंगाल तुरंत मैच में वापसी नहीं कर सकी। हालांकि उन्होंने लगातार प्रयास जारी रखा। पहले हाफ तक मुकाबले में इंटर काशी बढ़त बनाए हुए था।
पहले हाफ में ईस्ट बंगाल की सबसे बड़ी गलतियों में से एक यह रही कि टीम लगातार विंग से हमला करने की कोशिश कर रही थी। छोटे मैदान में विंग प्ले अक्सर उतना प्रभावी नहीं होता और यहां भी वही देखने को मिला। हालांकि दूसरे हाफ में ईस्ट बंगाल की टीम ने शानदार वापसी की।
50वें मिनट में ईस्ट बंगाल को बराबरी का गोल मिला। मिडफील्ड से अनवर ने गेंद यूसेफ एजेजारी को पास की। उन्होंने गोलकीपर को छकाते हुए दो डिफेंडरों के बीच से बाएं पैर से शॉट लगाकर गेंद को जाल में पहुंचा दिया। इस गोल में विपक्षी गोलकीपर की पोजिशनिंग और बाहर निकलने में भी गलती रही जिसका फायदा ईस्ट बंगाल को मिला।
59वें मिनट में इंटर काशी ने एक अच्छा हमला बनाया लेकिन उनका शॉट पोस्ट के बाहर चला गया। लेकिन ईस्ट बंगाल ने लगातार आक्रमण जारी रखा और आखिरकार उसका फायदा भी मिला। 73वें मिनट में टीम को दूसरा और निर्णायक गोल मिला। दाहिने विंग से बिपिन सिंह ने शानदार क्रॉस दिया।
गेंद मोहम्मद राशिद के पास पहुंची और उन्होंने चलते हुए गेंद पर चिप शॉट लगाकर गोल कर दिया। इस गोल में ईस्ट बंगाल खिलाड़ियों की समझदारी भी साफ दिखाई दी। उस समय एंटन ऑफसाइड में थे, जिसे देखते हुए राशिद ने खुद शॉट लेने का फैसला किया और गेंद सीधे गोल में चली गई।
इसके बाद कोई और गोल नहीं हुआ। ईस्ट बंगाल ने लगातार हमले किए लेकिन स्कोरलाइन नहीं बदली। हालांकि तब तक मुकाबले का नतीजा तय हो चुका था। अंतिम सीटी बजते ही ईस्ट बंगाल आधिकारिक रूप से ISL चैंपियन बन गया।
आज के अन्य मुकाबले
मोहन बगान ने एससी दिल्ली को 2-1 से हराया। वहीं जमशेदपुर और ओडिशा FC के बीच मुकाबला गोलरहित ड्रॉ पर समाप्त हुआ। दूसरी ओर मुंबई सिटी FC ने पंजाब FC को 2-0 से शिकस्त दी।