वॉशिंगटन डी.सी. : क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो के खिलाफ अमेरिका में हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यह कदम लगभग तीन दशक पुराने एक विवादित सैन्य अभियान को लेकर उठाया गया है, जिसमें चार अमेरिकी नागरिकों की मौत हुई थी।
करीब 30 साल पहले क्यूबा की वायुसेना ने गोलीबारी कर दो विमानों को मार गिराया था। इस घटना में चार अमेरिकी नागरिक मारे गए थे। अब उसी मामले में दक्षिणी फ्लोरिडा के यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नी कार्यालय के नेतृत्व में गठित एक संघीय ग्रैंड जूरी ने राउल कास्त्रो समेत छह लोगों को आरोपी बनाया है। अभियोजन प्रक्रिया का नेतृत्व अमेरिकी अटॉर्नी जेसन ए. रेडिंग क्विनोनेस कर रहे हैं।
बताया गया है कि 23 अप्रैल को ही आरोप तय कर दिए गए थे, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इन दस्तावेजों को सीलबंद रखा था। बुधवार, 20 मई को अमेरिकी न्याय विभाग ने इस सीलबंद अभियोग को सार्वजनिक किया।
जिस घटना को लेकर यह कानूनी कार्रवाई हुई, वह 24 फरवरी 1996 की है। मियामी स्थित क्यूबा निर्वासितों के संगठन ब्रदर्स टू द रेस्क्यू समुद्र में फंसे क्यूबाई शरणार्थियों की तलाश और सहायता के लिए दो छोटे ‘सेसना’ विमानों के जरिए अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में अभियान चला रहा था। आरोप है कि क्यूबा की वायुसेना के ‘मिग’ लड़ाकू विमानों ने इन दोनों विमानों का पीछा किया और हवा में ही उन्हें मार गिराया।
इस हमले में आर्मांडो अलेहान्द्रे, मारियो डे ला पेना, कार्लोस कोस्टा और पाब्लो मोरालेस नामक चार लोगों की मौत हुई थी। उस समय राउल कास्त्रो क्यूबा के रक्षा मंत्री थे। अमेरिकी पक्ष का आरोप है कि उन्होंने ही सीधे इस सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया था।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि हवाना की कम्युनिस्ट सरकार पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से ट्रंप प्रशासन ने इस पुराने मामले को फिर से सक्रिय किया है। मियामी में रहने वाले क्यूबाई-अमेरिकी समुदाय के बीच इस कार्रवाई को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।
हालांकि विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों का कहना है कि 95 वर्षीय राउल कास्त्रो को क्यूबा शायद ही कभी अमेरिका को सौंपेगा। ऐसे में दक्षिण फ्लोरिडा की अदालत में उनके व्यक्तिगत रूप से पेश होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। इसी वजह से कई विश्लेषक इस कदम को कानूनी कार्रवाई से अधिक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहे हैं। दूसरी ओर, क्यूबा सरकार ने इस मुकदमे की वैधानिकता और कानूनी आधार पर कड़ा विरोध जताया है।