चंडीगढ़ : किरातपुर साहिब के कोटला गांव के एक परिवार के चार सदस्य अक्टूबर 2000 में एक शादी समारोह से लौटते समय दुर्घटना का शिकार हो गए थे। बताया जाता है कि उनका वाहन भाखड़ा नहर में गिर गया था जिसके बाद लंबे समय तक खोजबीन के बावजूद न तो वे चारों लोग मिले और न ही उनका वाहन। अब 26 साल बाद वही मामला एक नए मोड़ पर पहुंचा है।
किरातपुर साहिब के नक्कियां गांव के पास मंगलवार को भाखड़ा नहर में एक व्यक्ति की तलाश के दौरान डुबकी लगाने वाले गोताखोर कमलप्रीत सिंह सैनी को पानी के नीचे पॉलिथिन और मिट्टी के बीच एक पुराना, टूटा हुआ चारपहिया वाहन दिखाई दिया। स्थानीय लोगों की मदद से रस्सी और ट्रैक्टर के सहारे उस वाहन को बाहर निकाला गया।
वाहन की तलाशी लेने पर पुलिस को मानव शरीर के लगभग 7 से 8 हड्डियों के टुकड़े मिले। इसके अलावा कपड़ों के फटे हुए हिस्से भी बरामद हुए, जिनमें एक बच्चे के कपड़े होने की भी संभावना जताई जा रही है।
जिन चार लोगों के 26 साल पहले लापता होने की बात सामने आई थी उनकी पहचान तेज राम, मुन्ने लाल, सुरजीत और सुरजीत का आठ वर्षीय बच्चा के रूप में हुई थी। पुलिस का अनुमान है कि मिले हुए अवशेष इन्हीं चारों लोगों के हो सकते हैं। हालांकि इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
मामले की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए सभी अवशेषों को डीएनए परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। वहीं, लापता लोगों के परिजनों ने घटनास्थल पर पहुंचकर कपड़ों के कुछ टुकड़ों की पहचान भी की है। बाद में इन वस्तुओं को गुरुद्वारा पातालपुरी साहिब ले जाया गया, जहां प्रार्थना के बाद उन्हें सतलुज नदी में प्रवाहित कर दिया गया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनिंदर सिंह ने कहा है कि यह वैज्ञानिक रूप से पुष्टि किए बिना नहीं कहा जा सकता कि ये अवशेष उन्हीं चार लोगों के हैं। इसकी पुष्टि केवल डीएनए परीक्षण के बाद ही संभव होगी।