कोलकाताः पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए 27 किलोमीटर क्षेत्र के लिए जमीन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंप दी है। इस जमीन का उपयोग सीमा पर कांटेदार तार की फेंसिंग लगाने और बॉर्डर आउटपोस्ट बनाने के लिए किया जाएगा। नबान्न में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार को जमीन हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेज सौंपे। इस दौरान प्रशासनिक स्तर पर इसे सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।
फेंसिंग कार्य को मिलेगी नई रफ्तार
जमीन उपलब्ध होने के बाद अब 27 किलोमीटर क्षेत्र में फेंसिंग का काम शुरू किया जा सकेगा। इससे लंबे समय से अटके हुए सीमा सुरक्षा प्रोजेक्ट को गति मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ने पर आगे भी अतिरिक्त जमीन दी जाएगी ताकि बाकी बचे क्षेत्रों में भी फेंसिंग का काम पूरा किया जा सके। इस फैसले के बाद सीमा पर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।
सीमा की स्थिति और लंबित काम
भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई लगभग 4,096 किलोमीटर है, जिसमें पश्चिम बंगाल का हिस्सा 2,216.7 किलोमीटर है। अब तक करीब 1,647.7 किलोमीटर क्षेत्र में फेंसिंग पूरी हो चुकी है। वहीं लगभग 569 किलोमीटर क्षेत्र अभी भी बिना फेंसिंग के है, जिसमें 112 किलोमीटर ऐसा इलाका शामिल है।यहां नदी और दलदली जमीन के कारण फेंसिंग करना मुश्किल है। इसके अलावा करीब 456 किलोमीटर ऐसा क्षेत्र भी है जहां फेंसिंग संभव है, लेकिन जमीन की उपलब्धता न होने के कारण काम रुका हुआ था।
सुरक्षा पर जोर और बीएसएफ की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पहले जमीन की अड़चन के कारण सीमा पर फेंसिंग का काम प्रभावित हुआ था, जिससे सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी थीं। उन्होंने ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ नीति का जिक्र करते हुए अवैध घुसपैठ पर सख्त कार्रवाई की बात कही। बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि जमीन मिलने से सीमा पर निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी और घुसपैठ व तस्करी पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य पुलिस के साथ बेहतर समन्वय से सीमा सुरक्षा और प्रभावी बनेगी।