नई दिल्ली : अटल पेंशन योजना अब देश के करोड़ों लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का बड़ा सहारा बन चुकी है। हालांकि इस योजना से जुड़ी ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि अधिकांश खाताधारकों ने सबसे कम यानी 1,000 रुपये मासिक पेंशन वाले विकल्प को चुना है। बुधवार को जारी पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार 13 मई तक इस योजना में पंजीकृत ग्राहकों की संख्या 9 करोड़ से अधिक हो चुकी है। इनमें से लगभग 7 करोड़ 94 लाख लोगों ने 1,000 रुपये मासिक पेंशन वाला विकल्प चुना है। यानी कुल ग्राहकों में करीब 87 प्रतिशत लोग न्यूनतम पेंशन योजना पर भरोसा जता रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर हर महीने 5,000 रुपये पेंशन वाले अधिकतम विकल्प को चुनने वाले ग्राहकों की संख्या केवल लगभग 70 लाख है। प्रतिशत के हिसाब से यह संख्या कुल खाताधारकों का करीब 8 प्रतिशत से कुछ अधिक है।
अन्य पेंशन श्रेणियों में ग्राहकों की संख्या और भी कम है। हर महीने 2,000 रुपये पेंशन का विकल्प लगभग 26 लाख लोगों ने चुना है, जो कुल का करीब 3 प्रतिशत है। 3,000 रुपये पेंशन श्रेणी में करीब 12 लाख लोग शामिल हैं। वहीं 4,000 रुपये मासिक पेंशन विकल्प चुनने वालों की संख्या केवल 4 लाख 58 हजार 698 है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 मई 2015 को इस योजना की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और कम आय वाले लोगों को रिटायरमेंट के बाद न्यूनतम आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना था।
वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने बताया कि फिलहाल अटल पेंशन योजना के तहत प्रबंधनाधीन कुल परिसंपत्ति यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। केवल वित्त वर्ष 2025-26 में ही रिकॉर्ड 1 करोड़ 35 लाख नए ग्राहक इस योजना से जुड़े हैं।
लिंग आधारित आंकड़ों में भी दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। कुल ग्राहकों में पुरुषों की हिस्सेदारी 51.43 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं की भागीदारी 48.54 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसके अलावा 26 हजार 192 ट्रांसजेंडर ग्राहक भी इस योजना से जुड़े हुए हैं।
पीएफआरडीए के अध्यक्ष एस रामन ने कहा कि देश में रिटायरमेंट के बाद आर्थिक तैयारी को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। खासतौर पर 18 से 25 वर्ष के युवाओं के बीच इस योजना में शामिल होने की प्रवृत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनके अनुसार युवा पीढ़ी अब लंबी अवधि की आर्थिक सुरक्षा को लेकर पहले से अधिक सजग हो रही है।
आयु वर्ग के आंकड़ों में भी यही रुझान दिखाई देता है। 21 से 25 वर्ष आयु वर्ग के ग्राहक सबसे अधिक हैं, जिनकी हिस्सेदारी कुल पंजीकरण का 27.6 प्रतिशत है। 26 से 30 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 24.1 प्रतिशत है, जबकि 31 से 35 वर्ष आयु वर्ग के ग्राहकों का अनुपात 19.15 प्रतिशत दर्ज किया गया है।
ओ पी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर राहुल सिंह का मानना है कि अटल पेंशन योजना में सबसे कम पेंशन विकल्प चुनने वाले लोगों की बड़ी संख्या यह साबित करती है कि कम आय वाले लोगों के लिए भी यह योजना रिटायरमेंट सुरक्षा को सस्ता और सुलभ बनाने में सफल रही है।
इस योजना में 18 से 40 वर्ष आयु का कोई भी भारतीय नागरिक शामिल हो सकता है। हालांकि जो लोग आयकर देते हैं या पहले कभी आयकर चुका चुके हैं, वे इस योजना का लाभ नहीं ले सकते। केंद्र सरकार 60 वर्ष की आयु के बाद मासिक पेंशन देने की गारंटी देती है। पेंशन की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति किस उम्र में योजना से जुड़ा और हर महीने कितना अंशदान जमा कर रहा है।