नई दिल्ली: अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली छूट की अवधि समाप्त होने के बावजूद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि अमेरिकी छूट की समय-सीमा खत्म होने के बाद भी तेल की आपूर्ति निर्बाध रूप से उपलब्ध है और रिफाइनरियों को कोई समस्या नहीं आ रही है।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद कभी भी अमेरिकी छूट के ढांचे पर निर्भर नहीं रही है। यह पूरी तरह से व्यावसायिक हितों और व्यावसायिक समझ पर आधारित है।
बाजार में कच्चे तेल की कमी नहीं
सुजाता शर्मा ने कहा, 'हमारे लिए खरीदारी करने का फैसला मूल रूप से व्यावसायिक समझ पर निर्भर करता है। बाजार में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त मात्रा में कच्चे तेल की व्यवस्था पहले ही बार-बार की जा चुकी है... इसलिए छूट हो या न हो, इससे हमारे ऊपर कोई असर नहीं पड़ेगा।'
अमेरिकी छूट समाप्त होने के बाद आया बयान
भारतीय अधिकारी की यह टिप्पणी तब आई है जब अमेरिका की ओर से कुछ रूसी कच्चे तेल की खरीद पर दी गई छूट पिछले हफ्ते समाप्त हो गई थी। इस छूट के तहत उन रूसी तेल कार्गो के लेनदेन की अनुमति थी जो पहले से ही टैंकरों पर लोड किए जा चुके थे।
अमेरिका ने पहली बार मार्च में यह छूट जारी की थी और बाद में अतिरिक्त आपूर्ति के माध्यम से वैश्विक तेल कीमतों पर दबाव कम करने के लिए इसकी वैधता 16 मई (बीते शनिवार) तक बढ़ा दी थी। हालांकि रूसी कच्चे तेल पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन वाशिंगटन ने इससे पहले भारत से रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद मॉस्को से रियायती दरों पर की जा रही खरीद को कम करने का आग्रह किया था।
भारतीय रिफाइनरियां पूरी तरह तैयार
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार घरेलू मांग में थोड़ी कमी और अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान और इराक से तत्काल कच्चे तेल के कार्गो की उपलब्धता के कारण भारतीय रिफाइनरियों को आपूर्ति में किसी भी व्यवधान से निपटने में कोई परेशानी नहीं होगी।
व्यापारियों ने ब्लूमबर्ग को बताया कि स्पॉट मार्केट में चीन की सीमित भागीदारी ने भी आपूर्ति की उपलब्धता बनाए रखने में मदद की है।
इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और नायारा एनर्जी लिमिटेड में रखरखाव के लिए काम बंद होने से निजी रिफाइनरियों द्वारा की जाने वाली खरीद में कमी आई है।
रेकॉर्ड स्तर पर आयात
साल 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों ने जब वैश्विक तेल व्यापार के रुख को बदला, तब से रियायती दरों पर मिलने वाला रूसी कच्चा तेल भारत के लिए आपूर्ति का एक बड़ा सोर्स बन गया है। भारतीय रिफाइनरियों ने पिछले साल वाशिंगटन के दबाव में आकर कुछ समय के लिए खरीद कम की थी, लेकिन बाद में आयात ने फिर से मजबूत वापसी की। केपलर (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार मई में भारत का रूसी तेल आयात करीब 19 लाख बैरल प्रति दिन रहने की उम्मीद है, जो कि इसके उच्चतम स्तर के बेहद करीब है।