वॉशिंगटन, डी.सी. : ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। युद्धविराम कितने समय तक कायम रहेगा, इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यूरेनियम भंडारण, आर्थिक प्रतिबंध हटाने और युद्ध क्षतिपूर्ति जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। ऐसे में शांति वार्ता लगभग विफल होती नजर आ रही है। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि समय तेजी से निकलता जा रहा है और जल्द फैसला नहीं लेने पर ईरान के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा।
रविवार को अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने लिखा, “घड़ी की सुइयां लगातार आगे बढ़ रही हैं। समय खत्म होता जा रहा है। इसके बाद ईरान के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अमेरिका किसी भी प्रकार की युद्ध क्षतिपूर्ति देने के पक्ष में नहीं है।
दरअसल अमेरिका ने ईरान के सामने शांति वार्ता के लिए कई शर्तें रखी हैं। ईरानी मीडिया में इन शर्तों को लेकर जोरदार चर्चा शुरू होने के बाद ट्रम्प का यह बयान सामने आया। वॉशिंगटन, डी.सी. चाहता है कि ईरान लगभग 400 किलोग्राम यूरेनियम अमेरिका को सौंप दे और एक परमाणु केंद्र को छोड़कर बाकी सभी परमाणु प्रतिष्ठान बंद कर दे। साथ ही ईरान को युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग भी वापस लेनी होगी। अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि वार्ता पूरी होने के बाद ही सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकी जाएगी।
इन प्रस्तावों पर ईरान ने फिलहाल सहमति नहीं जताई है। तेहरान ने साफ कहा है कि किसी भी वार्ता से पहले सभी सैन्य अभियान बंद किए जाए विशेष रूप से लेबनान में चल रही गतिविधियां रोकी जाएं। इसके अलावा ईरान आर्थिक प्रतिबंध हटाने, विदेशों में जब्त संपत्तियों की वापसी और युद्ध क्षतिपूर्ति की मांग पर अड़ा हुआ है। ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने की मांग भी दोहराई है।
इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के साथ बैठक की। इस दौरान पेजेश्कियन ने आरोप लगाया कि युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल ने आतंकी संगठनों को समर्थन देकर ईरान के भीतर अस्थिरता फैलाने की कोशिश की थी। हालांकि उन्होंने दावा किया कि यह प्रयास सफल नहीं हो सका। ईरानी राष्ट्रपति ने पड़ोसी देशों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक ने अपने क्षेत्रों का उपयोग ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल को नहीं करने दिया। उन्होंने इन देशों को सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया। पूरे घटनाक्रम के बीच पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ी तो क्षेत्र में हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं।