अबू धाबी : अबू धाबी के परमाणु बिजली संयंत्र के पास ड्रोन हमले को लेकर ईरान पर आरोप लगाए गए हैं। घटना के बाद जनरेटर कक्ष में भीषण आग लग गई हालांकि दमकल कर्मियों ने कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। इस हमले में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है और अब तक किसी के हताहत होने की खबर भी सामने नहीं आई है। संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने सीधे तौर पर ईरान का नाम नहीं लिया, लेकिन इतना जरूर कहा कि हमला पश्चिमी सीमा की दिशा से हुआ। इसी दौरान सऊदी अरब में भी ड्रोन हमले की जानकारी सामने आई है। भारत ने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा की है।
अबू धाबी से लगभग 270 किलोमीटर पश्चिम में फारस की खाड़ी के किनारे स्थित अल दाफरा शहर में बराकाह न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाया गया है। यह सिर्फ संयुक्त अरब अमीरात ही नहीं, बल्कि पूरे अरब जगत का पहला वाणिज्यिक परमाणु बिजली केंद्र माना जाता है। बुधवार दोपहर सुरक्षा कर्मियों ने बिजली संयंत्र के ऊपर अचानक तीन ड्रोन उड़ते हुए देखे। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सतर्क हो गईं। दो ड्रोन को गोली मारकर गिरा दिया गया लेकिन एक ड्रोन बिजली संयंत्र के विद्युत जनरेटर से टकरा गया, जिससे वहां आग लग गई।
अबू धाबी मीडिया कार्यालय के अनुसार बिजली जनरेटर में आग लगने की घटना हुई थी, लेकिन हालात पर तेजी से नियंत्रण पा लिया गया। अधिकारियों ने बताया कि परमाणु बिजली केंद्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और संयंत्र का काम सामान्य रूप से जारी है। संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि किसी परमाणु परियोजना को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन है। वहीं रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन हमले को “अनुचित आक्रामकता” करार देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा को बाधित करने के उद्देश्य से पश्चिमी सीमा के रास्ते तीन ड्रोन भेजे गए थे। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी किसी भी कोशिश का सख्ती से जवाब दिया जाएगा। हालांकि सरकारी बयान में कहीं भी ईरान का नाम नहीं लिया गया।
भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि संयुक्त अरब अमीरात के बराकाह परमाणु बिजली केंद्र पर हमला अत्यंत चिंताजनक है। भारत ने कहा कि इस तरह के हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं और इससे क्षेत्र की स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है। नई दिल्ली ने सभी पक्षों से संयम बरतने तथा बातचीत और कूटनीतिक समाधान की दिशा में लौटने की अपील की है।
फरवरी में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद संयुक्त अरब अमीरात ने कई बार आरोप लगाया था कि उसके ऊर्जा और आर्थिक ढांचे पर हुए हमलों के पीछे ईरान का हाथ है। दूसरी ओर सऊदी अरब ने भी दावा किया कि इराक की दिशा से उसकी हवाई सीमा में तीन ड्रोन घुसे थे, जिन्हें सुरक्षा बलों ने मार गिराया। इस पूरे मामले पर संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। एजेंसी के प्रमुख राफाएल ग्रोसी ने कहा कि स्थिति चिंताजनक है और एजेंसी लगातार नजर बनाए हुए है।
उल्लेखनीय है कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद एक सप्ताह के भीतर तेहरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर लगभग 2800 ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। इसके जवाब में संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के लावान द्वीप स्थित तेल शोधन केंद्र पर हमला किया था। हालांकि फिलहाल ईरान और अमेरिका युद्धविराम पर सहमत हो चुके हैं। इसके बावजूद परमाणु बिजली केंद्र के पास हुए ताजा ड्रोन हमले के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।