नई दिल्लीः दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में एचआईवी-एड्स और कई अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे एक अभियुक्त को जमानत प्रदान की है। अदालत ने यह फैसला जेल प्रशासन की ओर से दाखिल मेडिकल स्टेटस रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद सुनाया।
अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि अभियुक्त को उच्च स्तर की देखभाल और लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता है, जो जेल के मौजूदा माहौल में संभव नहीं दिखाई देती।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने अभियुक्त को नियमित जमानत देते हुए यह आदेश 9 मई को पारित किया। अभियुक्त को वर्ष 2025 में दर्ज एनडीपीएस एक्ट से जुड़े एक मादक पदार्थ मामले में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले के अन्य पहलुओं पर विस्तार से विचार किए बिना, मानवीय आधार पर अभियुक्त को नियमित जमानत देना उचित होगा।
21 किलोग्राम गांजा बरामदगी मामले से जुड़ा है अभियुक्त
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि अभियुक्त उस केस में शामिल है जिसमें उसकी स्कूटी पर सवार दो युवकों के पास से 21 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था। हालांकि न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा कि भले ही अभियुक्त गंभीर अपराध से जुड़ा हो, लेकिन अदालत इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं कर सकती कि वह एक इंसान है और एचआईवी-एड्स जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज भी है।
अदालत ने कहा कि अभियुक्त को भी स्वच्छ वातावरण में सांस लेने और गरिमा के साथ जीवन जीने के लिए उचित चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने का अधिकार है। जमानत देते समय अदालत ने मेडिकल स्टेटस रिपोर्ट और अन्य चिकित्सकीय दस्तावेजों का अवलोकन किया। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज स्पष्ट रूप से बताते हैं कि अभियुक्त लंबे समय से कई गंभीर और पुरानी बीमारियों से पीड़ित है।
अदालत ने कहा कि अभियुक्त को लगातार निगरानी, चिकित्सकीय विश्लेषण, पर्यवेक्षण और दवाओं की आवश्यकता है। इसके लिए उच्च स्तरीय इलाज और देखभाल जरूरी है, जो जेल जैसे वातावरण में मिल पाना कठिन है, विशेष रूप से तब जब जेल पहले से ही अत्यधिक दबाव में हो और लगातार व्यक्तिगत देखभाल देना संभव न हो। न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने यह भी उल्लेख किया कि अदालत को बताया गया है कि अभियुक्त को जेल में बंद रहने के दौरान ही एचआईवी-एड्स संक्रमण हुआ।
स्वास्थ्य आधार पर मांगी गई थी जमानत
अभियुक्त ने मुख्य रूप से स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देते हुए नियमित जमानत की मांग की थी। अभियुक्त की ओर से पेश अधिवक्ता निशांत नैन ने बहस के दौरान 15 दिसंबर 2025 की मेडिकल स्टेटस रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसे अभियोजन पक्ष ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष दाखिल किया था।
इसके अलावा 25 मार्च 2026 को अभियुक्त की नई मेडिकल रिपोर्ट और उससे जुड़े अन्य चिकित्सकीय दस्तावेज भी दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किए गए थे। बचाव पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि अभियुक्त एचआईवी/एड्स और तपेदिक जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित है और उसे लगातार चिकित्सकीय देखभाल और निगरानी की आवश्यकता है।
अधिवक्ता निशांत नैन ने अदालत का ध्यान 11 अप्रैल 2022 को उच्चतम न्यायालय और ओडिशा उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों की ओर भी दिलाया। उन मामलों में भी एचआईवी-एड्स से पीड़ित आरोपियों को समान आधारों पर जमानत प्रदान की गई थी।