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अपना ही रिकॉर्ड तोड़ सकता है अल-नीनो, केरल में समय से पूर्व मानसून आने की चेतावनी

रिपोर्ट में बताया गया है कि अगला अल नीनो बेहद शक्तिशाली होने वाला है जो 2027 तक चल सकता है। यह पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ सकता है।

By Moumita Bhattacharya

May 16, 2026 21:22 IST

साल 2026 सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता बढ़ाने वाला हो सकता है। सुपर अल-नीनो के प्रभाव से कहीं रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो सकती है जिसकी वजह से बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं तो कहीं सूखा पड़ सकता है।

मौसम विभाग की ओर से हाल ही में एक नया पूर्वानुमान जारी किया गया है जिसमें अक्तूबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच सुपर अल-नीनो की संभावनाएं जतायी गयी हैं।

बढ़ा रहा है दुनिया का तापमान

हर दो से 7 साल के बीच घटने वाली अल-नीनो समुद्री धाराओं के बदलते पैटर्न की वजह से होता है। इन पैटर्न में बदलाव की वजह से समुद्र की ऊपरी सतह के तापमान में 0.5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो जाता है जिसकी वजह से वैश्विक जलवायु पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।

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NBT की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अल्बानी विश्वविद्यालय के वायुमंडलीय और पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर पॉल राउंडी ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पर लिखा था कि वर्ष 1870 के दशक के बाद से सबसे बड़े अल-नीनो की संभावना है।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में हाल ही में अल-नीनो मई 2023 से मार्च 2024 तक चला था जिसकी वजह से ही 2024 से अब तक का मौसम गर्म बना हुआ है। वहीं क्लाइमेट ब्रीफ की जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि अगला अल नीनो बेहद शक्तिशाली होने वाला है जो 2027 तक चल सकता है। यह पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ सकता है।

बताया जाता है अक्तूबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच आने वाले अल-नीनो की वजह से समुद्र के सतह का तापमान 2 डिग्री तक बढ़ सकता है जिसकी वजह से ही इसे अनौपचारिक रूप से सुपर अल-नीनो कहा जा रहा है।

भारतीय मौसम विभाग की चिंता बढ़ी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक केरल में सामान्य रूप से 1 जून से पहले तक मानसून आ जाती है। वहीं इस साल 26 मई के आसपास तक मानसून के आगमन का पूर्वानुमान लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट में वैश्विक मौसम विभाग के हवाले से दावा किया गया है कि अलनीनो के जल्द ही विकसित होने और 2026-27 की उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों तक जारी रहने की संभावना है।

बताया जाता है कि इसकी वजह से ग्लोबल वॉर्मिंग बढ़ेगी और जिस कारण धरती का तापमान 2024 के रिकॉर्ड को भी छू सकता है। मौसम के बदलते पैटर्न का असर फसलों पर भी पड़ता है जिसकी वजह से पैदावार के कम होने की आशंका भी पैदा हो जाती है।

ANI

बता दें, धरती के इतिहास का सबसे शक्तिशाली अल-नीनो 1877 का बताया जाता है जिसके बाद 1876 से 1878 के बीच का वैश्विक अकाल आया था। इस अकाल में कथित तौर पर 5 करोड़ लोगों की मौत हो गयी थी जो उस समय की वैश्विक जनसंख्या का 3 प्रतिशत था।

IMD की आशंका

अल-नीनो के प्रभाव से कम वर्षा वाले मानसून की 35% संभावना है। इस वजह से कृषि क्षेत्रों में जोखिम बढ़ने की आशंका जतायी गयी है। मौसस विभाग का पूर्वानुमान है कि इस साल मानसून निर्धारित समय से पहले शुरू हो सकता है लेकिन मानसून के मुख्य महीनों के दौरान अगर अल-नीनो मजबूत रहता है , तो पूरे सीजन के दौरान बारिश कम होगी। इसका मतलब है कि मानसून में होने वाली कुल वर्षा भी घट जाएगी जिससे कृषि कार्य निश्चित रूप से प्रभावित हो सकते हैं।

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