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रुपया 96 के पार, इतिहास में पहली बार डॉलर के मुकाबले इतनी कमजोर हुई भारतीय करेंसी, क्या होगा आम आदमी का ?

विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक आर्थिक दबाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेश में कमी इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है।

By लखन भारती

May 15, 2026 15:46 IST

नयी दिल्लीः भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए आज का दिन एक बुरे सपने की तरह साबित हुआ। विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया (INR) अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर गिर गया है। इतिहास में पहली बार रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार कर गया। बाजार खुलते ही रुपये में जो गिरावट शुरू हुई, उसने निवेशकों और आम जनता के बीच हड़कंप मचा दिया है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपये की कमर तोड़ दी है। लेकिन, एक आम आदमी के लिए इसका मतलब सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह आपकी जेब पर होने वाला सीधा प्रहार है।

आम आदमी पर क्या होगा असर ?

भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा, जैसे खाद्य तेल (पाम ऑयल) और दालें, विदेशों से आयात करता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो इन चीजों को खरीदने के लिए हमें ज्यादा डॉलर चुकाने पड़ते हैं। इसका सीधा नतीजा यह होगा कि आने वाले दिनों में आपके किचन में इस्तेमाल होने वाला रिफाइंड तेल और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

पेट्रोल-डीजल और परिवहन की मार

रुपये की गिरावट का सबसे घातक असर ईंधन पर पड़ता है। भारत अपनी तेल जरूरत का 80% आयात करता है। 96 के पार रुपया जाने का मतलब है कि कच्चे तेल का आयात और महंगा हो जाएगा। इससे न केवल पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे, बल्कि ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ने से सब्जी और फल भी महंगे हो जाएंगे।

आरबीआई के सामने बड़ी चुनौती

रुपये को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचने पड़ सकते हैं। साथ ही, महंगाई को रोकने के लिए बैंक ब्याज दरों (Repo Rate) में बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो आपके होम लोन और कार लोन की ईएमआई (EMI) भी बढ़ सकती है।

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