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हॉकी इंडिया की कोचिंग नीति पर भड़के पीआर श्रीजेश, बोले- भारतीय कोचों को नहीं मिल रहा मौका

विदेशी कोचों की बढ़ती संख्या पर पूर्व भारतीय गोलकीपर ने जताई चिंता।

By शिखा सिंह

May 15, 2026 13:31 IST

नई दिल्ली : भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर और दो बार ओलंपिक कांस्य पदक जीतने वाले पीआर श्रीजेश ने हॉकी इंडिया की कोचिंग संरचना और प्रस्तावित “डेवलपमेंट टीम” को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ने उन्हें “डेवलपमेंट टीम” की जिम्मेदारी देने की पेशकश की थी लेकिन उससे जुड़े कई बुनियादी सवालों का अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

पीआर श्रीजेश ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ने मुझे ‘डेवलपमेंट टीम’ का प्रस्ताव दिया तो मैंने कुछ बेहद सामान्य सवाल पूछे। क्या वास्तव में कोई डेवलपमेंट टीम मौजूद है? इस डेवलपमेंट समूह में कौन-कौन खिलाड़ी शामिल हैं? इस कार्यक्रम की संरचना क्या है? इनके लिए कौन-कौन से प्रशिक्षण शिविर मंजूर किए गए हैं? टीम किन टूर्नामेंटों की तैयारी कर रही है?

उन्होंने आगे कहा कि इन सवालों में से किसी का भी जवाब उन्हें नहीं दिया गया। इसके साथ ही उन्होंने अपने कोचिंग रोल को लेकर भी नाराजगी जताई। श्रीजेश ने लिखा कि और गोलकीपर कोचिंग की बात करें तो जूनियर विश्व कप में मुख्य कोच के रूप में कांस्य पदक जीतने के बाद मुझे फिर से गोलकीपर कोच बना देना क्या पदोन्नति माना जाएगा या पदावनति?

श्रीजेश ने भारतीय हॉकी ढांचे में विदेशी कोचों और सपोर्ट स्टाफ की बढ़ती संख्या पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने विस्तार से बताया कि वर्तमान में भारतीय हॉकी प्रणाली में कई विदेशी विशेषज्ञ काम कर रहे हैं।

उन्होंने लिखा कि चार टीमें, छह विदेशी कोच, तीन विदेशी स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच। एक विदेशी वीडियो विश्लेषक। दो विदेशी गोलकीपर कोच जो विजिटिंग भूमिका में हैं। एक विदेशी खेल मनोवैज्ञानिक जो विजिटिंग भूमिका में हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हॉकी इंडिया ऐप के अनुसार फिलहाल प्रत्येक टीम में केवल एक भारतीय कोच मौजूद है। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने लिखा कि अच्छी बात है कि कम से कम अभी भी हर टीम में एक भारतीय कोच तो मौजूद है। जूनियर टीम पहले ही विदेशी हाथों में जा चुकी है। शायद अब अंडर-18 टीम की बारी है।

पूर्व कप्तान सरदार सिंह और दिग्गज महिला खिलाड़ी रानी रामपाल का जिक्र करते हुए श्रीजेश ने कहा कि दोनों अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन ऐसा लगता है कि हॉकी इंडिया नेतृत्व उन्हें अभी भी पर्याप्त अनुभवी या योग्य नहीं मानता।

उन्होंने लिखा कि सरदार सिंह और रानी रामपाल शानदार काम कर रहे हैं लेकिन शायद अध्यक्ष को लगता है कि वे अभी भी भारतीय टीमों को कोचिंग देने के लिए ‘पर्याप्त अनुभवी’ या ‘पर्याप्त योग्य’ नहीं हैं। तो क्या अब वहां भी और विदेशी कोच देखने को मिलेंगे?

पीआर श्रीजेश की यह टिप्पणी उस बयान के बाद सामने आई है जिसमें हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने कहा था कि श्रीजेश को भारतीय पुरुष जूनियर हॉकी टीम के कोच पद से “निकाला” नहीं गया है। तिर्की ने स्पष्ट किया कि श्रीजेश का कोचिंग कार्यकाल दिसंबर 2025 में अनुबंध के अनुसार समाप्त हुआ था।

दिलीप तिर्की का बयान उस समय आया जब दो बार के ओलंपिक कांस्य पदक विजेता श्रीजेश ने एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया था कि हॉकी इंडिया ने भारतीय पुरुष जूनियर टीम के लिए विदेशी कोच को मौका देने का फैसला किया, जिसके कारण उनका कार्यकाल समाप्त कर दिया गया।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप तिर्की ने कहा कि श्रीजेश का कोचिंग कार्यकाल उनके अनुबंध की शर्तों के मुताबिक समाप्त हुआ और उसके बाद नए कोच की नियुक्ति के लिए हॉकी इंडिया ने औपचारिक भर्ती प्रक्रिया अपनाई।

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