नई दिल्ली : ईरान-अमेरिका तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता के बीच BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट संदेश दिया। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करना आज वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में अस्थिरता विश्व व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
नई दिल्ली में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की इस बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। इसी मंच पर भारत ने हॉर्मुज मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत समुद्री मार्गों को खुला और सुरक्षित रखना अनिवार्य है। भारत ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की एकतरफा कार्रवाई या प्रतिबंध विकासशील देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालते हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने वक्तव्य में जोर देते हुए कहा हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर सहित सभी अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध नौवहन वैश्विक समृद्धि के लिए आवश्यक है। उन्होंने किसी देश का नाम लिए बिना यह भी कहा कि संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नींव होना चाहिए और संघर्षों का स्थायी समाधान केवल संवाद और कूटनीति से ही संभव है।
भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि उसकी ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर निर्भर है। भारत के कच्चे तेल और एलपीजी आयात का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। हाल के संघर्षों के कारण कई भारत-गामी जहाजों के फंसने की खबरें भी सामने आई हैं। इसी कारण भारत लगातार ईरान के साथ संपर्क में रहकर अपने समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है।
BRICS बैठक के दौरान ईरान ने पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाया। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इज़रायल की नीतियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं। साथ ही ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सैन्य भूमिका निभाने के आरोप लगाए जिससे बैठक का माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत ने संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाने की कोशिश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ईरान के विदेश मंत्री के साथ बैठक में क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि युद्ध नहीं बल्कि संवाद ही समाधान का रास्ता है।
BRICS मंच पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक सत्र के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और UAE के प्रतिनिधि खलीफा शाहीन अल मरार के बीच गर्मागर्म बहस हुई, जिसे शांत कराने के लिए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को हस्तक्षेप करना पड़ा।
इस बैठक में पश्चिम एशिया का युद्ध, गाज़ा संकट, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार व्यवस्था प्रमुख मुद्दे रहे। सदस्य देशों के बीच मतभेद के बावजूद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को खुला रखने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारु बनाए रखने पर व्यापक सहमति व्यक्त की गई। BRICS समूह जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका मूल सदस्य है इसका विस्तार 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल करके किया गया था जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इस समूह में शामिल हुआ।