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विराट कोहली ने याद किया अपना टेस्ट दौर, बोले- हर खिलाड़ी में थी जिम्मेदारी की भावना

चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे और रविचंद्रन अश्विन जैसे खिलाड़ियों के साथ साझा नेतृत्व ने दिलाई

By शिखा सिंह

May 15, 2026 12:36 IST

बेंगलुरु : भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने पिछले वर्ष टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद अब अपने कप्तानी कार्यकाल को याद किया है। उन्होंने बताया कि टीम में खिलाड़ियों के बीच उम्र का अंतर बहुत कम होने के कारण सभी खिलाड़ियों ने जिम्मेदारी और टीम के प्रति स्वामित्व की भावना साझा की जिसका फायदा भारतीय टेस्ट टीम को लंबे समय तक मिला।

विराट कोहली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा किए गए आरसीबी पॉडकास्ट के टीजर में बातचीत कर रहे थे। 37 वर्षीय विराट ने पिछले वर्ष टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा था। खराब फॉर्म के दौर के बाद उन्होंने इस प्रारूप से संन्यास लिया। अपने टेस्ट करियर में उन्होंने 46.85 की औसत से 9,230 रन बनाए, जिसमें 30 शतक शामिल रहे। वह भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में चौथे सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं।

कप्तान के तौर पर भी विराट का रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा। उन्होंने 68 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की और 40 मुकाबलों में जीत दिलाई। वह भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान बने। विराट ने पहली बार 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान कप्तानी संभाली थी जब महेंद्र सिंह धोनी चोट के कारण टीम से बाहर थे।

वीडियो में विराट कोहली ने कहा कि मैं अक्सर उन दिनों को याद करता हूं जब मुझे इतने लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट खेलने और भारत की कप्तानी करने का अवसर मिला। हमने कई शानदार जीत हासिल कीं और भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक सुनहरे दौर का हिस्सा बने। उस समय हमारी टीम में युवा खिलाड़ियों का एक समूह था जिनका सपना भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना था। उन खिलाड़ियों को अपने जीवन का सबसे बड़ा मौका मिला था।

विराट ने आगे कहा कि टीम के मुख्य खिलाड़ियों जैसे चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, रविचंद्रन अश्विन, ईशांत शर्मा, मोहम्मद शमी और रविंद्र जडेजा के बीच उम्र का अंतर बहुत अधिक नहीं था। लगभग सभी खिलाड़ी अपने 20वें दशक में थे और इसी वजह से टीम का औसत आयु स्तर कम था। इससे टीम के भीतर सीनियर और जूनियर खिलाड़ियों के बीच किसी प्रकार की दूरी महसूस नहीं होती थी।

उन्होंने कहा कि अगर आप हमारी टीम की औसत उम्र देखें तो सीनियर और जूनियर के बीच किसी तरह की झिझक नहीं थी। हर खिलाड़ी पहले कुछ समय तक वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ खेल चुका था। बाद में जो युवा खिलाड़ी टीम में आए वे भी हमारे लिए दोस्तों जैसे बन गए थे। इसका असर यह हुआ कि भले ही मैं कप्तानी कर रहा था और टीम प्रबंधन एक खास दिशा में टीम को आगे बढ़ा रहा था लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि हर खिलाड़ी खुद को जिम्मेदार महसूस करता था।

विराट ने कहा कि टीम में ऐसा माहौल नहीं था कि केवल कुछ खिलाड़ी ही टीम की जिम्मेदारी उठाएंगे और बाकी का कोई योगदान नहीं होगा। सभी खिलाड़ियों को लगता था कि वे आने वाले छह, सात या आठ वर्षों के लिए एक मजबूत टीम तैयार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं था कि कुछ लोग टीम संभालेंगे और बाकी खिलाड़ियों का कोई काम नहीं है। हम सभी युवा थे और चाहते थे कि आने वाले वर्षों के लिए एक मजबूत टीम बनाई जाए। हर खिलाड़ी अपने आप से सवाल पूछता था कि वह टीम को बेहतर बनाने के लिए क्या कर सकता है। यही भावना हमारी सबसे बड़ी ताकत बनी।

विराट कोहली का कप्तानी कार्यकाल सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा बल्कि भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दौर के रूप में याद किया जाता है। उनकी कप्तानी में भारत ने 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट श्रृंखला जीत दर्ज की। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भारतीय टीम ने कुल सात टेस्ट मैच जीते जो किसी भी एशियाई कप्तान द्वारा सबसे अधिक हैं।

विराट की आक्रामक शैली, फिटनेस पर विशेष ध्यान और तेज गेंदबाजो को मजबूत बनाने की रणनीति ने विदेशी दौरों पर भारतीय टीम की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को नई ऊंचाई दी। वहीं घरेलू परिस्थितियों में रविचंद्रन अश्विन और रविंद्र जडेजा की स्पिन जोड़ी ने भारत को लंबे समय तक अजेय बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई।

विराट कोहली ने 2022 में दक्षिण अफ्रीका दौरे के बाद टेस्ट कप्तानी छोड़ दी थी। इसके बाद रोहित शर्मा को कप्तानी सौंपी गई। बाद में रोहित शर्मा और विराट कोहली दोनों ने इंग्लैंड दौरे से पहले टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया जिसके बाद युवा बल्लेबाज शुभमन गिल को टीम की कमान सौंपी गई।

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