नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट बयान जारी कर उन मीडिया रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि सरकार विदेश यात्रा पर टैक्स, सेस या सरचार्ज लगाने पर विचार कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह की खबरों में “जरा भी सच्चाई नहीं है” और यह दावा पूरी तरह गलत है। उन्होंने दोहराया कि सरकार का किसी भी प्रकार की ऐसी पाबंदी लगाने का कोई इरादा नहीं है।
This is totally false.
— Narendra Modi (@narendramodi) May 15, 2026
Not an iota of truth in this.
There is no question of putting such restrictions on foreign travel.
We remain committed to improving ‘Ease of Doing Business’ and ‘Ease of Living’ for our people. https://t.co/9lxjbxz0nV
विवाद की जड़ बनी मीडिया रिपोर्ट
विवाद की शुरुआत उन मीडिया रिपोर्टों से हुई, जिनमें सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि सरकार विदेश यात्रा पर अस्थायी टैक्स या सेस लगाने पर विचार कर रही है।
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि यह कदम पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आयात लागत बढ़ने के कारण विदेशी मुद्रा खर्च को नियंत्रित करने के उद्देश्य से हो सकता है। यह भी कहा गया कि प्रस्ताव पर उच्च स्तर पर चर्चा चल रही है, हालांकि कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था।
बढ़ती विदेश यात्राएं और खर्च के आंकड़े
सरकारी और अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय नागरिकों ने लगभग 3.17 करोड़ विदेश यात्राएं कीं, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक है।
विदेश यात्रा पर खर्च भी तेजी से बढ़ा है और यह 31.7 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 35 अरब डॉलर (करीब 2.65 से 2.9 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह खर्च आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा प्रवाह पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
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पीएम की अपील और सरकार की प्राथमिकता
यह विवाद उस समय सामने आया जब प्रधानमंत्री ने 10 मई को हैदराबाद में एक रैली के दौरान नागरिकों से अपील की थी कि वे गैर-जरूरी विदेश यात्राएं कुछ समय के लिए टालें, घरेलू खर्च में संयम रखें और संभव हो तो वर्क फ्रॉम होम को अपनाएं।
हालांकि इसे किसी नीति या बाध्यता के रूप में नहीं देखा गया।
प्रधानमंत्री के खंडन के बाद यात्रा उद्योग में स्पष्टता आई है और अनिश्चितता खत्म हुई है। सरकार ने दोहराया है कि उसका फोकस “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” और “ईज ऑफ लिविंग” को मजबूत करने पर है, न कि किसी प्रकार के नए टैक्स या प्रतिबंध लगाने पर।