🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

ईरान का हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बड़ा बयान, जहाजों की आवाजाही को लेकर नई शर्तें

भारत दौरे में जयशंकर और मोदी से मुलाकात, क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर

By प्रियंका महतो

May 15, 2026 18:48 IST

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में तेज होते समुद्री संकट के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक नौवहन के लिए खुला है, हालांकि यह सुविधा केवल उन देशों के जहाजों को नहीं दी जाएगी जो ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में हैं। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि इस रणनीतिक जलमार्ग की स्थिति “बहुत जटिल” हो गई है लेकिन ईरान ने अभी भी नियंत्रित सहयोग की नीति अपनाई हुई है।

अराघची ने कहा जहां तक हमारी चिंता है, हॉर्मुज सभी के लिए खुला है, केवल उन देशों के जहाजों को छोड़कर जो हमारे साथ युद्ध में हैं।” उन्होंने आगे यह भी कहा कि ईरान पारगमन चाहने वालों की सहायता करने के लिए तैयार है। ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान का उद्देश्य समुद्री मार्गों में सुगम आवागमन बनाए रखना है और आश्वासन दिया कि हम सभी जहाजों के सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था करेंगे।

उन्होंने क्षेत्रीय शांति की बहाली को समुद्री सामान्य स्थिति से सीधे जोड़ते हुए कहा “जैसे ही आक्रामकता समाप्त होगी, मुझे विश्वास है कि सब कुछ सामान्य हो जाएगा।इस उच्चस्तरीय कूटनीतिक बयान में अराघची ने एक महत्वपूर्ण भौगोलिक और कानूनी दावा भी किया जिसमें उन्होंने कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, पूरी तरह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र नहीं है। यह महत्वपूर्ण बयान उस समय सामने आया जब ईरानी विदेश मंत्री 18वें ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा पर थे।

शुक्रवार को उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग पर चर्चा हुई। इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच बहुपक्षीय स्थिरता को मजबूत करना बताया गया। अराघची ने कहा कि नई दिल्ली के साथ हुई चर्चाओं में दोनों देशों के बीच “करीबी दृष्टिकोण”, “समान चिंताएँ” और “समान हित” दिखाई दिए हैं।

उन्होंने यह भी पुष्टि की कि ईरान भारतीय पक्ष के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखेगा ताकि समुद्री मार्गों से जहाजों की सुचारु आवाजाही सुनिश्चित की जा सके और उम्मीद जताई कि “आक्रामकता समाप्त होने के बाद चीजें सामान्य हो सकती हैं। हालांकि ईरानी विदेश मंत्री ने संयुक्त राज्य अमेरिका को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि तेहरान को “अमेरिकियों पर कोई भरोसा नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने केवल तब कूटनीति का रास्ता अपनाया जब उसकी सैन्य रणनीति विफल हो गई।अराघची ने कहा 40 दिनों के युद्ध के बाद जब अमेरिका को अपने आक्रमण में कोई सफलता नहीं मिली, तब उन्होंने बातचीत का प्रस्ताव दिया।” उन्होंने आगे कहा हमारे पास अमेरिकियों पर भरोसा न करने के पर्याप्त कारण है जबकि उनके पास हम पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस जलमार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर तत्काल प्रभाव डाल सकती है।अराघची के बयान ने एक बार फिर उस नाज़ुक संतुलन को उजागर किया है जहां क्षेत्रीय संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।

Articles you may like: