नई दिल्लीः नीदरलैंड्स के द हेग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डच कंपनियों को भारत में निवेश बढ़ाने, डिजाइन करने और उत्पादन करने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत आज तेज आर्थिक विकास, सुधारों और स्थिर नीतियों के कारण वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
प्रधानमंत्री ने यह बात अपने डच समकक्ष रॉब जेटेन के साथ सीईओ राउंडटेबल बैठक के दौरान कही, जिसमें वैश्विक उद्योग जगत के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हुए।
भारत को बताया वैश्विक ग्रोथ का मजबूत आधार
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और वैश्विक विकास में लगभग 17 प्रतिशत योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि लगातार आर्थिक सुधारों, नीति स्थिरता और निवेश-अनुकूल माहौल ने भारत को वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है। सरकार ने स्पेस, माइनिंग और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को भी निजी निवेश के लिए खोला है।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स–एएसएमएल समझौता बना मुख्य आकर्षण
कार्यक्रम के दौरान गुजरात के धोलेरा में स्थापित होने वाले सेमीकंडक्टर फैब प्रोजेक्ट के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ।
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने इस सहयोग का स्वागत किया और इसे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया। यह साझेदारी सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता बढ़ाने और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
ग्रीन हाइड्रोजन और टेक्नोलॉजी पर फोकस
भारत और नीदरलैंड्स ने ग्रीन हाइड्रोजन, तकनीक, नवाचार और शोध के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
दोनों देशों ने विश्वविद्यालय साझेदारी, स्टार्टअप सहयोग और टैलेंट मोबिलिटी को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और नीदरलैंड्स की साझेदारी अब रणनीतिक स्तर पर पहुंच रही है और आने वाले वर्षों में यह और गहरी होगी।
FTA और वैश्विक साझेदारी पर बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यह दोनों पक्षों के बीच भरोसेमंद और खुले व्यापार तंत्र को मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा कि यह समझौता निवेश, सप्लाई चेन और आर्थिक सहयोग को नई गति देगा। प्रधानमंत्री ने डच कंपनियों को भारत में अपनी उपस्थिति और निवेश बढ़ाने का आग्रह किया और कहा कि 300 से अधिक डच कंपनियां पहले से भारत में सक्रिय हैं।
सीईओ राउंडटेबल में ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, शिपिंग, टेक्नोलॉजी और कृषि जैसे क्षेत्रों की वैश्विक कंपनियों ने भारत में अपने विस्तार की योजनाएं साझा कीं।