वॉशिंगटन, डी.सी. : संघर्षविराम लागू रहने के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और कूटनीतिक अनिश्चितता के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए संकेतों ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक एआई-निर्मित तस्वीर साझा की है। इस तस्वीर में वे एक टोपी पहने दिखाई दे रहे है, जिस पर ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ लिखा है। यह वही नारा है जिसे 2024 के चुनाव प्रचार के दौरान लोकप्रिय बनाया गया था और जिसके बाद वे दूसरी बार सत्ता में लौटे। तस्वीर में उनके पीछे एक अमेरिकी नौसेना के एडमिरल भी दिखाई दे रहे हैं।
चित्र में एक युद्धपोत पर दोनों को दिखाया गया है, जहां चारों ओर उफनता समुद्र, बिजली की चमक और युद्ध जैसी परिस्थितियां दिखाई देती हैं। पीछे ईरान का एक युद्धपोत भी दर्शाया गया है। इस पोस्ट के कैप्शन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा तूफान से पहले की शांति।हालांकि इस पोस्ट के बाद ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने अब तक इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
चीन यात्रा से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्तावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे पहले दस्तावेज़ की शुरुआती पंक्तियाँ देखते हैं और यदि वह पसंद नहीं आती तो उसे तुरंत खारिज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य विवाद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर बना हुआ है। तेहरान द्वारा इस क्षेत्र पर नियंत्रण की संभावना का अमेरिका लगातार विरोध करता रहा है। इसी वजह से इस रणनीतिक जलमार्ग में तनाव बना हुआ है और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित है।
जानकारों का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मध्यावधि चुनावों से पहले हॉर्मुज मार्ग को पूरी तरह खोलने को एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं। लेकिन ईरान की स्थिति इस दिशा में बाधा बनी हुई है, जिससे संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका बढ़ रही है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम एशिया के खुफिया सूत्रों का कहना है कि अमेरिका और इज़रायल के कई वरिष्ठ अधिकारी एक बार फिर सैन्य अभियान की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। इस संभावित अभियान का नाम भी “एपिक फ्यूरी 2.0” बताया जा रहा है। इससे पहले फरवरी में इसी तरह का एक अभियान “एपिक फ्यूरी” चलाया गया था।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इस मुद्दे पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत हुई थी, हालांकि उस बातचीत का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया। चीन, ईरान का रणनीतिक साझेदार माना जाता है और वह हॉर्मुज़ जलमार्ग के खुले रहने का पक्षधर है ताकि ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो। फिलहाल चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन चीन से लौटने के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आक्रामक रुख एक बार फिर वैश्विक कूटनीतिक समीकरणों पर सवाल खड़े कर रहा है।