युद्ध के कारण पूरे विश्व में ईंधन संकट झेल रहा है। इसलिए ईंधन बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर से कोविड की तरह वर्क फ्रॉम होम करने की सलाह दी है। हालांकि उस कोविड के समय से ही कई ऑफिस में वर्क फ्रॉम होम का जो नियम शुरू हुआ था, वह आज भी जारी है। वर्तमान में वर्क फ्रॉम होम केवल आवश्यक परिस्थितियों का विकल्प नहीं रहा, बल्कि कई लोगों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। घर से घंटों-घंटों ऑफिस का काम, मीटिंग, लक्ष्य को पूरा करना—सब कुछ चल रहा है। लेकिन इतनी मेहनत के बावजूद कई लोग वांछित सफलता नहीं पाते। पदोन्नति रुक जाती है, वेतन वृद्धि नहीं होती, यहां तक कि काम के प्रति रुचि कम होने लगती है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, इसके पीछे घर का गलत कार्यपरिवेश भी एक बड़ा कारण हो सकता है। प्रचलित विश्वास है कि जिस जगह पर व्यक्ति बैठकर काम करता है, उस जगह की ऊर्जा या पॉवर सीधे उनके काम और मानसिकता पर असर डालती है।
कौन-कौन से वास्तु नियमों का पालन करेंगे ?
सफाई-व्यवस्था
वास्तु शास्त्र के अनुसार, कार्यस्थल को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखना अत्यंत आवश्यक है। अगर टेबल पर बेतरतीब फाइलें, उलझे हुए तार या आसपास गंदगी हो, तो इसका नकारात्मक प्रभाव मन पर भी पड़ता है। इसलिए जल्दी थकान आती है, काम में ध्यान कम हो जाता है। रोज अपने वर्कस्पेस को साफ रखना आवश्यक है। टेबल पर केवल आवश्यक चीजें रखें और टूटी या खराब चीजों को तुरंत हटा दें। इससे सकारात्मक वातावरण बना रहता है और काम में ध्यान भी बढ़ता है।
काम करने की मुद्रा
काम करते समय बैठने की मुद्रा भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। बहुत से लोग बिस्तर पर बैठकर या लेटकर काम करते हैं, जिसे वास्तु शास्त्र और स्वास्थ्य विशेषज्ञ—दोनों ही अनुचित मानते हैं। गलत तरीके से बैठकर काम करने पर शरीर में जल्दी थकान आती है और पीठ या कंधे में दर्द शुरू हो सकता है। इसका प्रभाव काम की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। इसलिए हमेशा टेबल-चेयर पर सीधे बैठकर काम करने की सलाह दी जाती है। कंप्यूटर की स्क्रीन आंखों के समांतर हो, इसका भी ध्यान रखना जरूरी है। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और मन भी सक्रिय रहता है।
रोशनी-हवा
वास्तुशास्त्र में रोशनी और दिशा के महत्व का भी विशेष उल्लेख किया गया है। अत्यधिक उज्ज्वल या बहुत कम रोशनी आंखों पर दबाव डालती है और चिड़चिड़ापन और थकान बढ़ाती है। कार्यस्थल पर प्राकृतिक रोशनी सबसे अच्छी मानी जाती है। अगर यह संभव न हो, तो हल्के सफेद रोशनी का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके काम करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और मानसिक स्थिरता बढ़ती है, ऐसा विश्वास किया जाता है।
काम और विश्राम की अलग जगह
एक ही जगह पर काम और विश्राम दोनों करना बहुत महत्वपूर्ण नहीं है। जहां सोते हैं, वहां काम करने से मस्तिष्क काम और विश्राम के बीच अंतर नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप मानसिक दबाव और चिंता बढ़ सकती है। काम करते समय टीवी, मोबाइल नोटिफिकेशन और अत्यधिक शोर से दूर रहना भी आवश्यक है। शांत और अनुशासित वातावरण में काम करने से एकाग्रता बढ़ती है और सफलता की संभावना भी बढ़ जाती है।