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जापान में वीजा सख्ती: भारतीय रेस्तरां मालिक को देश छोड़ने का आदेश

नई वीजा नीति में पूंजी और शर्तें बढ़ीं, छोटे विदेशी व्यवसाय प्रभावित

टोक्यो : मणिश कुमार ने 1990 के दशक में पढ़ाई पूरी करने के बाद जापान का रुख किया था। इसके बाद उन्होंने वहीं बसने का निर्णय लिया और सैटामा में अपना जीवन स्थापित किया। करीब 18 वर्ष पहले उन्होंने “सैटामा प्रीफेक्चर” नाम से एक भारतीय रेस्तरां शुरू किया था जो अपने विभिन्न भारतीय व्यंजनों के कारण जापानी ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गया। समय के साथ उनका व्यवसाय भी अच्छी तरह स्थापित हो गया। इसी दौरान उन्होंने विवाह किया और उनके दो बच्चे भी हुए जिनका पालन-पोषण भी जापान में ही हुआ।

हालांकि पिछले वर्ष जापान सरकार ने “बिजनेस मैनेजर वीजा” नियमों को सख्त करना शुरू किया और कई शर्तों में बदलाव किए। मणिश कुमार इसी वीजा के आधार पर जापान में रह रहे थे और अपना व्यवसाय चला रहे थे। जब उन्होंने वीजा नवीनीकरण के लिए आवेदन किया तो लगभग दो सप्ताह पहले उन्हें सूचित किया गया कि उनका वीजा अब नवीनीकृत नहीं किया जाएगा। उन्हें स्पष्ट रूप से कहा गया कि उन्हें अपने देश वापस लौटना होगा।

यह आदेश मिलने के बाद टोक्यो में आयोजित एक विरोध सभा में मणिश कुमार भावुक होकर रो पड़े। उन्होंने कहा मुझे समझ नहीं आ रहा कि अब मैं क्या करूं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके दोनों बच्चों का जन्म और पालन-पोषण जापान में ही हुआ है और वे केवल जापानी भाषा जानते हैं। ऐसे में पूरे परिवार को देश छोड़ने के लिए कहा जाना उनके लिए बेहद कठिन स्थिति है।

इस “बिजनेस मैनेजर वीजा” नीति के खिलाफ टोक्यो में विदेशी छोटे व्यवसायियों और विशेषकर रेस्तरां मालिकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। इस दौरान मणिश कुमार ने कहा, “मेरे बच्चों का जन्म और परवरिश जापान में हुई है। वे केवल जापानी भाषा समझते हैं। अब हमें अपने देश लौटने को कहा जा रहा है, मैं समझ नहीं पा रहा कि क्या करूं।

विदेशी छोटे व्यवसायियों ने वीजा नीति को वापस लेने की मांग करते हुए जन हस्ताक्षर अभियान भी चलाया और जापान इमिग्रेशन सर्विस एजेंसी को ज्ञापन सौंपा। गौरतलब है कि “बिजनेस मैनेजर वीजा” के तहत व्यवसाय करने के साथ-साथ परिवार सहित लंबे समय तक जापान में रहने की अनुमति मिलती थी। पहले इसके लिए लगभग 50 लाख येन (करीब 30 लाख रुपये) की पूंजी पर्याप्त थी और शर्त थी कि कम से कम दो पूर्णकालिक कर्मचारी नियुक्त किए जाएं।

लेकिन अक्टूबर पिछले वर्ष जापान सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए न्यूनतम पूंजी को लगभग छह गुना बढ़ा दिया और कई अतिरिक्त शर्तें भी जोड़ दीं। सरकार का कहना है कि इस वीजा का उपयोग कई लोग केवल लंबे समय तक रहने के लिए करने लगे थे न कि वास्तविक व्यवसाय संचालन के लिए। इसलिए नियम सख्त किए गए हैं। हालांकि आलोचकों का मानना है कि इन बदलावों से लंबे समय से स्थापित कई छोटे विदेशी व्यवसाय भी गंभीर संकट में आ गए हैं।

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