🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत ‘USS Gerald R. Ford’ 11 महीने बाद अमेरिका लौटा, क्या अब थमेगा ईरान तनाव?

ईरान तनाव के बीच लाल सागर से लौटे अमेरिकी युद्धपोत ने खड़े किए नए सवाल

वासिंगटन डी.सी. : पश्चिम एशिया में लंबे सैन्य अभियान के बाद दुनिया का सबसे बड़ा और अमेरिका का सबसे आधुनिक युद्धपोत ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ आखिरकार शनिवार को अमेरिका लौट आया। यह युद्धपोत वर्जीनिया स्थित ‘नेवल स्टेशन नॉरफ़ॉक’ पर पहुंचा। इसके साथ ही यह सवाल तेज हो गया है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब ईरान के साथ चल रहे तनाव को कम करने की दिशा में बढ़ रहे हैं।हालांकि इस दौरान युद्धपोत को कई तकनीकी और सुरक्षा समस्याओं का भी सामना करना पड़ा। 12 मार्च को जहाज में अचानक आग लग गई थी। इस हादसे में दो लोग घायल हुए और युद्धपोत के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा।

इसके अलावा जहाज की शौचालय और अपशिष्ट निष्कासन प्रणाली में भी दिक्कतें सामने आई। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि जहाज की जटिल वैक्यूम प्रणाली बार-बार खराब हो रही थी जिससे गंदगी निकालने वाली पाइपलाइनें जाम हो जाती थीं और उन्हें ठीक करना मुश्किल हो रहा था। शनिवार को ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ के साथ अमेरिकी नौसेना के डेस्ट्रॉयर ‘यूएसएस बेनब्रिज’ और ‘यूएसएस महान’ भी अमेरिका लौटे। इन युद्धपोतों के स्वागत के लिए अमेरिकी रक्षा सचिव पीटर हेगसेथ खुद नेवल स्टेशन नॉरफाॅक पहुंचे।

नौसैनिकों का अभिनंदन करते हुए पीटर हेगसेथ ने कहा आप लोगों ने सिर्फ अपना कर्तव्य नहीं निभाया बल्कि इतिहास भी रचा है।लगातार 11 महीने समुद्र में तैनात रहना अमेरिकी नौसेना के लिए एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। वियतनाम युद्ध के बाद यह सबसे लंबी समुद्री तैनाती बताई जा रही है। इस लंबे अभियान के दौरान नौसैनिकों के परिवारों में लगातार चिंता बनी हुई थी। अब उनके लौटने से परिवारों ने राहत की सांस ली है। ‘जेराल्ड आर. फोर्ड’ पर एविएशन इलेक्ट्रिशियन के रूप में कार्यरत एक सैनिक के पिता अमिनी ओसियास ने अमेरिकी मीडिया नेटवर्क सीएनएन से कहा अब जाकर चैन की नींद सो पाऊंगा।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल ‘जेराल्ड आर. फोर्ड’ की वापसी से पश्चिम एशिया का तनाव खत्म नहीं माना जा सकता। इस क्षेत्र में अभी भी अमेरिकी युद्धपोत ‘अब्राहम लिंकन’ तैनात है। इसके अलावा हाल ही में ‘जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश’ युद्धपोत भी वहां पहुंच चुका है।फिलहाल संबंधित देशों ने युद्धविराम पर सहमति जताई है लेकिन हालात पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। क्षेत्र में अब भी छिटपुट हमले जारी हैं। ऐसे में जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में संघर्ष फिर से तेज हो सकता है।

मई की शुरुआत में पश्चिम एशिया से रवाना हुआ यह युद्धपोत कई महीनों तक अलग-अलग सैन्य अभियानों में सक्रिय रहा। ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ को दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक युद्धपोत माना जाता है। इसमें लगभग पांच हजार नौसैनिक तैनात थे। 24 जून 2025 को यह युद्धपोत अमेरिका के वर्जीनिया तट से रवाना हुआ था। मिशन की शुरुआत भूमध्यसागर में तैनाती के साथ हुई। बाद में अक्टूबर 2025 के आसपास इसे कैरेबियाई क्षेत्र में भेजा गया जहां यह वेनेज़ुएला के करीब तैनात रहा।

जनवरी में अमेरिका के ‘ऑपरेशन सदर्न स्फीयर’ और ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजाॅल्व’ अभियानों में इस युद्धपोत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अमेरिकी रक्षा विभाग का दावा है कि वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अभियान में ‘जेराल्ड आर. फोर्ड’ की भूमिका बेहद अहम थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस युद्धपोत की सहायता के बिना वह अभियान सफल नहीं हो पाता।

इसके बाद फरवरी से ईरान के साथ तनाव बढ़ने लगा। ऐसे में ‘जेराल्ड आर. फोर्ड’ को कैरेबियाई क्षेत्र से हटाकर पश्चिम एशिया भेज दिया गया। इस युद्धपोत ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत कई सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया। मार्च में इसे स्वेज नहर पार कर लाल सागर में तैनात किया गया ताकि अमेरिकी सेना ईरान के करीब से अभियान चला सके।

Articles you may like: